Samwad 2025: शिक्षा और कौशल का तालमेल कैसे बनाएं? संवाद के मंच पर एक्सपर्ट्स ने दिया सफलता का मंत्र
Amar Ujala Samwad Lucknow 2025: अमर उजाला के दो दिवसीय कार्यक्रम 'अमर उजाला संवाद' का आज शुभारंभ हुआ। प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे, डॉ. हरिओम और डॉ. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा और कौशल के समन्वय पर मंथन किया।
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Amar Ujala Samwad: अमर उजाला संवाद के मंच पर आज प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे, डॉ. हरिओम और डॉ. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा और कौशल (स्किल) के बीच बेहतर तालमेल या समन्वय को लेकर विचार-विमर्श किया। इस प्रेरणादायक सत्र में हुई चर्चा से युवा वर्ग को अपने भविष्य की दिशा तय करने संबंधी कई सवालों के जवाब मिले।
अगले 5 वर्षों में और 50,000 टिंकरिंग लैब स्कूलों में होंगे: प्रो. अनिल
शिक्षा और कौशल (स्किल) के बीच बेहतर तालमेल विषय पर प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे ने अपनी बात की शुरुआत एनईपी पर चर्चा के साथ की। उन्होंने कहा कि एनईपी आने के बाद धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए लगातार काम चल रहा है। लगातार लोगों को इससे जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में 10,000 टिंकरिंग लैब्स की शुरुआत की गई है। अगले 5 वर्षों में और 50,000 टिंकरिंग लैब स्कूलों में होंगे। एनईपी छठी कक्षा से ही कौशल विकसित करने पर केंद्रित है।
शिक्षा प्रणाली की पुनर्निर्माण हो रहा है। इसमें एनईपी बड़ी भूमिका में है। प्राथमिक स्तर पर जब लिखित परीक्षा के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया के अलावा क्रिटिकल थिंकिंग, एनालिटिक एबिलिटी विकसित करने पर काम किया जाएगा, तो युवा खुद नवाचार की ओर बढ़ेंगे।
एआई लेकर कहा - कहां लक्ष्मणरेखा खीचनीं है यह समझना जरूरी
एआई पर बात करते हुए प्रो. अनिल ने कहा कि एआई शिक्षा पर नकारात्मक और साकारात्मक दोनों प्रभाव डाल रहा है, लेकिन हमें साकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एआई का इस्तेमाल तेजी से बेहतर सीखने के लिए करना चाहिए। हालांकि, छात्रों को यह समझाना इसकी लिमिटेशन समझाना भी बेहद जरूरी है। छात्रों को यह समझाना होगा कि कहां लक्ष्मणरेखा खीचनीं है।
छात्रों को मार्गदर्शन की जरूरत: अनिल सहस्रबुद्धे
एनईपी के सारे पहलु अगर अगले पांच साल लागूं करेंगे तो निश्चय ही अच्छा रिजल्ट मिलेगा। इंडस्ट्रीज अक्सर कहती हैं कि हमारे ग्रेजुएट छात्र रोजगार के लायक नहीं हैं। 8 साल पहले स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन की शुरुआत की गई थी। इसके तहत छात्रों सरकारी और प्राइवेट विभागों, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत, एनजीओ और समाज से आने वाले करीब 500 प्रॉब्लम स्टेटमेंट दी जाती हैं। जो भी छात्र आउट ऑफ द बॉक्स सॉल्यूशन देते हैं, उन्हें शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
आश्चर्य की बात यह है कि जो प्रॉब्लम्स इसरो, डीआरडीओ और अन्य सरकारी विभाग के बड़े-बड़े ज्ञानी लोगों से भी 10-15 सालों तक भी सॉल्व नहीं कर सके थे, उन्हें यूजी के छात्रों ने सॉल्व कर दिया। इससे पता चलता है कि हमारे छात्रों को सपोर्ट सिस्टम, उत्साहवर्धन और सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
कौशल पर डॉ हरिओम ने युवाओं के मन की उलझन की दूर
आईएएस डॉ हरिओम ने लखनऊ में आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शिक्षा और कौशल का समन्वय विषय पर अपनी बात रखीं। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा को कौशल से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने "प्रवीण" एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसकी शुरुआत 2016 से हुई थी। लेकिन अभी हमने 200 सरकारी इंटर कॉलेज के 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को 2024-25 में इनरोल किया है। उसमें हमने 100 करोड़ का बजट रखा है। इसमें कक्षा 9वीं और 11वीं में पढ़ने वाले छात्रों को कोई एक स्किल देने की कैम्पैन शुरू किया है। यूपी के 60 जिलों को इसके तहत कवर किया गया है, जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में इसको लागू किया जाएगा।
नई शिक्षा नीति को उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ लागू किया जा रहा है और आगे इसको बढ़ाएंगे। सरकार पहले सभी सरकारी स्कूलों को कवर करने के बाद प्राइवेट स्कूलों को भी जोड़ने का काम करेगी।
सरकार की योजनाओं पर डाला प्रकाश
आईएएस डॉ हरिओम ने केंद्र द्वारा चल रही कौशल विकास के बारे में बताते हुए कहा कि कौशल विकास के लिए जो केंद्र की नीति है, उसमें सरकार अपना पूर्ण योगदान कर रही है।दीनदयाल कौशल विकास योजना, इसमें 1.5 लाख से अधिक लाभार्थी शामिल हो चुके है। पीएम इंटर्नशिप योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी स्कीम को यूपी कौशल विकास विभाग संचालित कर रहा है।
कौशल विकास में सॉफ्ट स्किल्स को भी जोड़ना चाहिए
डॉ हरिओम ने आगे कहा कि कौशल विकास को सिलेबस का पार्ट बनाना चाहिए। प्रोजेक्ट प्रवीण कक्षा 9वीं से शुरू हो रहा है, हालांकि बहुत छोटे बच्चे स्किल्स उस तरह से नहीं समझ सकते, लेकिन सॉफ्ट स्किल्स उनको समझ आ सकती है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास में सॉफ्ट स्किल्स को भी जोड़ना चाहिए।
इंडस्ट्री का भी प्रो-एक्टिव रोल अभी नहीं है। जिस तरह से इस योजना के लिए जरूरी है। हम चाहते है कि हमारी अपरेंटिस स्कीम और पीएम इंटर्नशिप स्कीम में जो अवसर इंडस्ट्री के तरफ से होना चाहिए वो बहुत ही कम है। इंडस्ट्री को मिनिमम वेजेस है उसको सरकारी स्तर उसे ऊपर रखना चाहिए।
डॉ. कृष्णमूर्ति ये बोले
एनईपी के बाद शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों पर अपनी बात की शुरुआत करते हुए डॉ कृष्णमूर्ति ने कि सबसे पहले समझने की जरूरत है कि शिक्षा एक विशेष टॉपिक क्यों है। यह एक जटिल मुद्दा है, जिसके रास्ते में कई समस्याएं हैं। यह समस्याएं छात्रों, सरकार और संस्थानों के स्तर पर हैं।
- छात्रों के स्तर पर: छात्र नहीं पढ़ना चाहते, यह एक ग्राउंड रियलिटी है। अगर आप छात्र से कहेंगे कि यह पढ़ना है, यह पढ़ना है, तो उनमें एक स्वाभाविक प्रतिरोध (inherent resistance) होगा। उन्हें यह समझाना पड़ेगा कि क्यों पढ़ना है।
- टीचर के स्तर पर: अब पावर प्वाइंट का कल्चर आ गया है और अधिकतर टीचर पावर प्वाइंट पर ही सब कुछ दिखा देते हैं।
- सरकार के स्तर पर: सरकार के अपने मुद्दे, विजन हैं और इसलिए इम्प्लीमेंटेशन में फर्क हो सकता है। विजन अच्छा है, लेकिन इम्प्लीमेंटेशन को समय लगता है। तो आपका जो सवाल है कि क्या फर्क दिखेगा, हां बिल्कुल क्या आपको दिखेगा भी? तो बिलकुल नहीं।
कृष्णमूर्ति ने कहा, "हमने नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन (implementation) शुरू कर दिया था, जिसके लिए 2021 में एक टास्क फोर्स बनाई गई थी, ताकि इसे समझा जा सके और बदलाव लाए जा सकें, लेकिन इसका असर अभी तुरंत नहीं दिखेगा, यह आने वाले समय में नजर आएगा। आप शिक्षा में कुछ भी बदलाव लाते हैं, तो उसका परिणाम आपको तुरंत दिखाई नहीं देगा। इसका असर सामने आने में कम से कम 10 साल लग सकते हैं, कुछ चीजें पहले बदलेंगी, कुछ बाद में।"
पढ़ाई के दौरान ही स्किल डेवल्पमेंट पर ध्यान देना जरूरी: कृष्णमूर्ति
छात्रों को पढ़ाई करते हुए छोटे-छोटे कोर्स करना भी एक जरूरी है। स्कूल के बच्चों को चिकित्सा क्षेत्र से ज्यादा जोड़ने की आवश्यकता पर कृष्णमूर्ति बोले, "मुझे नहीं लगता कि सिर्फ चिकित्सा के लिए कुछ अलग से किया जाना चाहिए, क्योंकि नई शिक्षा नीति उच्च शिक्षा के लिए नहीं बनी है, लेकिन यह प्रारंभिक शिक्षा (Primary Education) के लिए बहुत अच्छी है।"
अतिथियों के बारे में
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद, बेंगलुरु की कार्यकारी समिति के वर्तमान अध्यक्ष हैं। वे वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) और राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) के अध्यक्ष भी हैं। डॉ. हरिओम 1997 बैच के आईएएस अधिकारी, संगीतकार और लेखक हैं। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग में प्रमुख सचिव के रूप अपनी सेवा दे रहे हैं। वहीं, डॉ. कृष्णमूर्ति वर्तमान में सुभारती यूनिवर्सिटी में कार्यकारी अधिकारी हैं। वे अपने सर्जिकल कौशल, मानवीय स्पर्श, परिश्रम और रोगियों, छात्रों के प्रति समर्पण और सबसे कठिन परिस्थितियों को संभालने के तरीके के लिए जाने जाते हैं।
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