Supreme Court: तमिलनाडु सरकार को आदेश, सेवारत डॉक्टर कोटे की 50 फीसदी सीटें 15 दिन में भरी जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को चालू शैक्षणिक वर्ष के लिए नीट-योग्य सेवारत उम्मीदवारों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर-स्पेशियलिटी सीटों का 50 प्रतिशत आवंटित करने की अनुमति दे दी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को चालू शैक्षणिक वर्ष के लिए नीट-योग्य सेवारत उम्मीदवारों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर-स्पेशियलिटी सीटों का 50 प्रतिशत आवंटित करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने राज्य सरकार को तमिलनाडु सरकार के सात नवंबर, 2020 के आदेश के अनुसार 15 दिनों की अवधि के भीतर सीटें भरने का निर्देश दिया। राज्य सरकार ने सुपर स्पेशलिटी सीटों पर 50 फीसदी आरक्षण के लिए 2020 में जारी सरकारी आदेश का पुरजोर बचाव किया था।
तमिलनाडु राज्य ने 16 मार्च, 2022 के एक आदेश के स्पष्टीकरण के लिए अदालत से संपर्क किया है, कि उक्त आदेश याचिकाओं के निपटान तक बाद के सभी शैक्षणिक वर्षों में भी लागू है। एएसजी ने कहा कि पिछले साल इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कई सीटें भरी नहीं जा सकीं। उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्ति हैं और उन्हें बेकार जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है ...
पीठ ने कहा कि हम एएसजी की चिंता की सराहना करते हैं कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने की आवश्यकता है। हालांकि, वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए, हम लगता है कि राज्य को जीओ के आधार पर सीटें भरने की अनुमति दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 16वें दिन, तमिलनाडु राज्य भारत संघ को उन सभी सीटों के बारे में सूचित करेगा जो सेवारत उम्मीदवारों से खाली रह गई हैं।
शीर्ष अदालत ने 14 फरवरी, 2023 को विस्तृत सुनवाई के लिए मामले को पोस्ट करते हुए कहा कि रिक्त सीटों को अखिल भारतीय योग्यता सूची के आधार पर भारत संघ द्वारा भरने की अनुमति दी जाएगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि 2016 से सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में आरक्षण नहीं है। तमिलनाडु की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) अमित आनंद तिवारी ने शीर्ष अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण मांगने के लिए एक अंतरिम आवेदन दायर किया है।
शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट क्वालिफाई सेवारत उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत सुपर-स्पेशियलिटी सीटें आवंटित करने के लिए 2021-22 के लिए काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति दी थी। जबकि शीर्ष अदालत ने 27 नवंबर, 2020 के अपने अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें उसने निर्देश दिया था कि शैक्षणिक वर्ष 2020-2021 के लिए सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग इन-सर्विस डॉक्टरों को 50 प्रतिशत कोटा प्रदान किए बिना आगे बढ़ेगी।
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