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महाकुंभ-2001

Wed, 19 Dec 2012 06:33 PM IST
नई दिल्ली/इलाहाबाद/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इलाहाबाद/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 19 Dec 2012 06:33 PM IST
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mahakumbh 2001

सहस्त्राब्दि के पहले महाकुंभ को लेकर न सिर्फ सनातनधर्मावलंबियों बल्कि देश के कोने-कोने से आए संतों, अखाड़ों में उत्साह तो विदेशियों में उत्सुकता थी। पहली बार संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाने वाले स्नानार्थियों का आंकड़ा तकरीबन एक करोड़ के पार रहा। इसी तरह मेले में तकरीबन एक लाख से ज्यादा विदेशियों ने मौजूदगी दर्ज कराई।

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- परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती 'मुनिजी' की पहल पर तिब्बत के बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा और कांची कामकोटि के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की मौजूदगी में प्रयाग संगम आरती समिति की ओर से संगम पर नियमित आरती, पूजन का क्रम आरंभ हुआ।
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- महाकुंभ के दौरान ही गुजरात के भुज में भूकंप की हलचल संगम की रेती तक रही। प्रशासन पंडाल में ज्योतिषियों के महाकुंभ का आयोजन किया गया जिसमें यह मुद्दा हावी रहा कि ज्योतिर्विदों ने ऐसी आपदा के बारे में आगाह क्यों नहीं किया।
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- महाकुंभ में पहली बार महामृत्युंजय पीठ के शंकराचार्य स्वामी अखिलेश्वरानंद ने साध्वी अपर्णा भारती को पहली महिला जगद्गुरु बनाया। कुंभ के दौरान यह घटना काफी चर्चित रही।

- इसी क्रम में सनातन धर्म और कैलाश के सम्मान के लिए 'कश्मीर में पांचवां कुंभ लगाना है और कैलाश मानसरोवर को चीन से मुक्त कराना है' का मुद्दा छाया रहा।

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