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पांच सौ जगहों से पानी के नमूने लेकर मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन

Fri, 22 Nov 2019 01:48 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Fri, 22 Nov 2019 01:48 AM IST
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Demonstration at the CM residence after taking samples of water from five hundred places in delhi
गंदे पानी पर दिल्ली में राजनीति - फोटो : अमर उजाला
गंदे पानी पर दिल्ली में राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। बृहस्पतिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं दिल्ली में पांच सौ जगहों से एकत्रित जल लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी चाह रहे थे कि वह मुख्यमंत्री को जल सौंपे, लेकिन उन्हें पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद वे फ्लैग रोड पर ही धरने पर बैठ गए।
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भाजपा के हर कार्यकर्ता व नेता के हाथ में एक बोतल में गंदे पानी का नमूना था। मुख्यमंत्री तक पहुंचाने में नाकाम कार्यकर्ताओं ने आरोप मढ़ा कि मुख्यमंत्री ने न तो दूषित जल को लिया और न ही उनका कोई प्रतिनिधि लेने आया। प्रदर्शनकारी ‘स्वच्छ वायु, स्वच्छ पानी, जनता का अधिकार है, जो न दे पाये सरकार, वो सरकार बेकार है‘..के नारे लगा रहे थे।
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प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कर रहे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठ कर धरना शुरू कर दिया। तिवारी ने कहा कि हम लोग इस पानी को मुख्यमंत्री को पिलाने पहुंचे हैं, लेकिन प्रशासन की मदद से मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने निवास से दूर रोक दिया। अब तीन महीने बाद दिल्ली की जनता ही मुख्यमंत्री को पानी पिलाएगी। क्योंकि मुख्यमंत्री अब 2024 तक पानी देने की बात कर रहे है। सिर्फ तारीख पर तारीख दे रहे है, लेकिन साफ पानी नहीं दे रहे है।
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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जनता न तो साफ हवा में सांस ले पा रही है और न ही उन्हें साफ पानी मिल रहा है। जनता सड़क पर है और मुख्यमंत्री ने अभी तक आपातकाल बैठक तक नहीं बुलाई है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि 500 अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री को सौंपने आए थे। जनता का दर्द मुख्यमंत्री के साथ बांटने पहुंचे थे, लेकिन इसकी सुध नहीं ली गई। कार्यक्रम संयोजक कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि ऐसे मुख्यमंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। बिजवासन से पानी लेकर पहुंचे भाजपा नेता मनजीत लोचन का कहना था कि न तो साफ पानी सरकार दे रही है और न ही अपनी गलती मानने को तैयार है। बिजवासन के लोग सीवर का पानी पीने को मजबूर है।

बीआईएस अफसरों पर हो कार्रवाई : मोहनिया
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। मोहनिया के मुताबिक बीआईएस ने अपनी रिपोर्ट में सैंपल की साइज और प्रदूषकों की मात्रा का जिक्र नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गैर जिम्मेदार बीआईएस अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

दिल्ली सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए मोहनिया ने बताया कि पेयजल को लेकर आई केंद्र सरकार की रिपोर्ट में कई खामियां हैं। रिपोर्ट में दिया गया एक पता मौजूद ही नहीं है, एक ने सैंपल उठाने से ही मना किया। एक सैंपल मंत्री राम विलास पासवान के घर व एक दफ्तर का है, जबकि एक उनकी पार्टी के पदाधिकारी का। बावजूद इसके दिल्ली जल बोर्ड दोबारा इन जगहों से सैंपल लेकर जांच कर रहा है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी। मोहनिया के मुताबिक केंद्र सरकार की रिपोर्ट तकनीकी तौर पर भी सही नहीं है। सैंपल लेने की एसओपी पता नहीं है। जबकि आमतौर पर सैंपल लेकर उसे सील किया जाता है। फिर इसकी जांच लैब में होती है।

117 इलाकों में अभी सप्लाई गड़बड़
दिनेश मोहनिया ने बताया कि पांच साल पहले दिल्ली के 2300 इलाकों में गंदा पानी आता था। सरकार बनने के बाद बड़े पैमाने पर पानी व सीवर की लाइन बदली गई है। फिर भी, अभी करीब 117 इलाके ऐसे हैं, जहां पानी गंदा आ रहा है। इन इलाकों में जल्द ही पाइप लाइन डाली जाएगी।

33000 किमी लंबी है लाइन
मोहनिया के मुताबिक, जल बोर्ड की पाइपलाइन करीब 33000 किमी लंबी है। ऐसे में किसी जगह लीकेज हो जाती है। लेकिन डब्ल्यूएचओ का मानक है कि पांच फीसदी पानी गंदा हो सकता है। जबकि दिल्ली जल बोर्ड के दो फीसदी सैंपल ही खराब मिले।

प्रदेश भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से ऐसी तस्वीर जारी करने की मांग की है, जिसमें वह सार्वजनिक नल से पानी पीते फोटो का विज्ञापन दे, जैसे वह डेंगू के खिलाफ जारी कर रहे थे। इसे लेकर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी की खराब गुणवत्ता को लेकर चिंता जाहिर की है।


पत्र में यह भी लिखा गया है कि सर्वे रिपोर्टें बताती हैं की दिल्ली जल बोर्ड को प्रति दिन प्रदूषित पानी की शिकायत मिलती है। दिल्ली सरकार यह दावा करती है कि जल बोर्ड का पानी उच्च गुणवत्ता का है। मुख्यमंत्री का दायित्व है की वह पानी की गुणवत्ता को पर विश्वास अर्जित करने के लिए अपने आवास, कार्यालय एवं दिल्ली जल बोर्ड मुख्यालय वरूणालय में लगे सभी वाटर आरओ सिस्टम को हटाने का आदेश दें। सत्ताधारी दल के सभी सांसद, मंत्री, विधायक, पार्षद और नेता भी अपने घरों से आरओ सिस्टम हटाए। आम जनता की तरह सप्लाई का पानी पीए।
 
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