ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन डिग्री एक यूजीसी रेगुलेशन में मर्ज होंगे

सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 May 2020 11:05 AM IST
विज्ञापन
online class
online class - फोटो : pixabay

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर Free में
कहीं भी, कभी भी।

70 वर्षों से करोड़ों पाठकों की पसंद

ख़बर सुनें

सार

- सरकार की आठ सदस्यीय कमेटी मर्ज ऑफ ऑनलाइन एंड ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन रेगुलेशन बनाने में जुटी, 15 मई तक आएगी रिपोर्ट
-यूजीसी अभी तक ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम को अलग-अलग रेगलुेशन से करवाती है पढ़ाई

विस्तार

कोरोना वायरस से बचाव के वैश्विक लॉकडाउन का सबसे अधिक बदलाव शिक्षा में होगा। विश्वविद्यालयों की कैंपस और ऑफ कैंपस की बाध्यता (वाउडेंशन)खत्म हो जाएगी। क्योंकि तकनीक के इस युग में अब फेस टू फेस की बजाय ऑनलाइन लर्निंग पर जोर रहेगा। इसी मकसद से  सबसे प्राचीनतम प्रणाली " ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग " और  आधुनिक तकनीक वाले "ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम " के रेगुलेशन को मर्ज करने करने जा रही है।
विज्ञापन

इसके लिए आठ सदस्यीय कमेटी " मर्ज ऑफ ऑनलाइन एंड ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन रेगुलेशन " बना रही  है।  सरकार की यह तीसरी कमेटी १५ मई तक  उच्च शिक्षा में एक  बड़े बदलाव पर रिपोर्ट देगी। अभी तक कमेटी की दो बैठक हो चुकी हैं।
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभी तक देशभर में ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग के तहत पढ़ाई करवाने वाले ओपन और अन्य विश्वविद्यालय संशोधित यूजीसी रेगुलेशन 2018(ओपन एंड डिस्टेंस  लर्निंग) के तहत पढ़ाई करवा रहे हैं।
जबकि विदेशों की तर्ज पर भारत में भी पहली बार मार्च २०२० में सात विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई की अनुमति यूजीसी रेगुलेशन2019(ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम) के तहत करवाने की मंजूरी मिली है। हालांकि इग्नू समेत कई ऐसी ओपन यूनिवर्सिटी हैं, जोकि डिस्टेंस और ऑनलाइन दोनों से जुड़ी हैं।

ऐसे में विश्वविद्यालयों को एक ही काम करवाने में दो अलग-अलग  यूजीसी रेगुलेशन को फॉलो करना पड़ता है। इससे समय अधिक लगता है। वही एक ही काम के लिए अलग अलग मंजूरी लेनी पडती है। जबकि फर्क सिर्फ इतना है कि ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग में किताब  छात्रों के पास सीधे घर पहुंचायी जाती है। जबकि ऑनलाइन में  छात्र के पास कही भी कभी भी सीधे उसके कंप्यूटर पर क्लासेज व लर्निंग कटेंट  उपलब्ध हो जाता है।

-ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो 40 फीसदी तक पहुंचाना:
मोदी सरकार पार्ट -दो के सौ दिन के एजेंड़ा में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस इंरोलमेंट रेशियो) को 2023  तक 40 फीसदी तक पहुंचाना है। जबकि अभी तक यह 26.3 फीसदी है। जबकि 2017 में यह 25.8 फीसदी था। उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी तभी होगी, जब उन्हें कामकाज के साथ पढ़ाई के अन्य विकल्प मिलेंगे। ग्रॉस एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए सरकार की यह तैयारी बेहद कारगर सिद्ध होगी। क्योंकि इससे यूनिवर्सिटी ओर अधिक स्टूडेन्ट को उच्च शिक्षा से जोड़ सकती है। क्योंकि आधे से अधिक छात्र परिवार की जरूरत के चलते पढ़ाई छोड़ कामकाज मे लग जाते हैं। ऐसे विकल्प मिलेंगे तो वे काम के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी कर लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us