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दिल्ली विश्वविद्यालय में 9 विषयों के पाठ्यक्रम को मंजूरी, कांचा इलैया की पुस्तकों पर रोक

Thu, 25 Oct 2018 06:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Oct 2018 06:40 AM IST
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Nine subjects Syllabus of post Graduate course approved in Delhi University
Delhi University

दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अब लेखक कांचा इलैया की पुस्तकें नहीं पढ़ाई जाएंगी। इन पुस्तकों में कुछ विवादित टिप्पणियों के चलते यह निर्णय लिया गया है। डीयू की शैक्षिक मामलों की स्टैडिंग कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं, बैठक में राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से दलित शब्द को हटाने की सिफारिश की गई है। इसे नवंबर में होने वाली एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक में स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाए जाने वाले लगभग नौ विषयों के पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई। 

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स्टैडिंग कमेटी के सदस्य प्रो हंसराज ने बताया कि बुधवार को कमेटी ऑन एकेडेमिक मेटर की बैठक हुई। इसमें स्नातकोत्तर स्तर के विषयों को लेकर चर्चा की गई। बैठक में सबसे ज्यादा बहस पॉलिटिकल साइंस के पाठ्यक्रम को लेकर हुई, जिसमें कांचा इलैया की तीन पुस्तकों को लेकर बहस हुई। बीते दिनों इन पर गंभीर आरोप लगने के बाद इनकी पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। इन पुस्तकों में वाय आई एम नॉट ए हिंदू, पोस्ट हिंदू इंडिया व एक अन्य पुस्तक को हटाया गया है। 
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वहीं, प्रो सुमन ने राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में दलित बहुजन पॉलिटिकल थॉट में दलित शब्द पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों दलित शब्द के प्रयोग को लेकर कई राज्यों में प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस कारण इस शब्द को पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए। साथ ही जहां-जहां दलित शब्द का प्रयोग किया गया है उसके स्थान पर अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्रो सुमन ने बताया कि कमेटी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
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वहीं एमएस स्तर के अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान सोशियोलॉजी, मॉडर्न इंडियन लैंग्वेज एंट लिट्रेरी स्टडीज, लाइब्रेरी एंड इंर्फोमेशन साइंस, बुद्धिस्ट स्टडीज, इतिहास, एलएलबी, एलएलएम विषयों के पाठ्यक्रम पर भी चर्चा की गई। अंग्रेजी विभाग के नवीनतम पाठ्यक्रम विकलांगता अध्ययन एवं इसका साहित्यिक निरूपण पर प्रो सुमन ने सुझाव दिया कि इसमें लूई ब्रेल और हेलेन केलर जैसे विकलांगता के आधार स्तंभों के विचारों को भी शामिल किया जाना चाहिए।  

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