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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: लेफ्ट, एबीवीपी और बापसा में सीधी जंग, पढ़ें क्या हैं चुनाव के मुद्दे

Wed, 05 Sep 2018 10:57 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Sep 2018 10:57 PM IST
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JNU students elections 2018 direct battle in Left, ABVP and BAPSA
JNUSU elections

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में इस बार लेफ्ट बनाम एबीवीपी और बापसा के बीच सीधी जंग होगी। वामपंथी छात्र संगठनों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि बापसा ने अलग रहकर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। अध्यक्ष पद के 8 उम्मीदवार हैं। इनमें तीन निर्दलीय और एक छात्र राजद का है। लेफ्ट गठबंधन के तहत आइसा को अध्यक्ष, डीएसएफ को उपाध्यक्ष, एसएफआई को महासचिव और एआईएसएफ को संयुक्त सचिव पद दिया गया है।

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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव कमेटी के आयुक्त हिमांशु कुलश्रेष्ठ ने बुधवार को सेंट्रल पैनल और स्कूल व सेंटर के काउंसलर पद के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। इस दौरान छात्र संगठनों ने अपने प्रत्याशियों के साथ चुनावी घोषणा पत्र भी जारी किया। अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने चुनावी मुद्दों से मतदाताओं को रू-ब-रू भी  कराया।
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वामपंथी छात्र संगठनों के एकता पैनल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार एन. साई बालाजी ने असम और नगालैंड में आई बाढ़ पर मुख्यमंत्री राहत कोष में अधिक से अधिक पैसा जमा कराने की मांग रखी। बालाजी ने कहा कि आज देश में असहमति अपराध बन गई है।
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सरकार या विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ कुछ भी बोलने वाले को जुर्माने का नोटिस थमा दिया जाता है और मामला तक दर्ज करा दिया है। उन्होंने हेफा में सवा पांच करोड़ रुपये के लोन, दाखिला फीस में बढ़ोत्तरी पर भी सवाल उठाया।

JNU students elections 2018 direct battle in Left, ABVP and BAPSA
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वहीं, एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ललित पांडेय के मुताबिक, कैंपस में डर का माहौल बनाकर छात्रों को परिषद से दूर किया जा रहा है। उन्होंने वर्तमान छात्रसंघ (वामपंथी) पर आरोप लगाया कि वह छात्रों के मुद्दों को सही तरीके से नहीं उठा पाया है और पूरे साल मोदी सरकार के खिलाफ राजनीति में ही लगा रहा। 

उधर, छात्र राजद के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार जयंत कुमार ने कहा कि जेएनयू का चुनाव देश को 2019 की दिशा देगा। जयंत ने कैंपस से लापता छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी, फीस बढ़ोत्तरी, उच्च शिक्षा के फंड की कटौती आदि मामले भी उठाए।

बापसा के अध्यक्ष पद प्रत्याशी थालापल्ली प्रवीण ने वर्तमान छात्र संघ पर आरोप लगाया कि जेएनयू में पीएचडी और एफ फिल की सीटों में कटौती हुई तो प्रशासन भवन पर 18 दिन तक प्रदर्शन हुआ। छात्र संघ के पदाधिकारियों ने हमारा साथ देने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की।

एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विकास यादव ने एबीवीपी से सवाल किया कि जब आपकी सरकार है तो छात्रवृत्ति बढ़वा क्यों नहीं देते। उन्होंने वाम संगठनों पर आरोप लगाया कि ये मुद्दों को छोड़कर बाकी सभी बात करते हैं। दो निर्दलीयों झानू कुमार हीर और साइब बिलावल ने भी अपनी बातें रखीं।

एबीवीपी का दांव उत्तराखंड और यूपी पर

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लाल दुर्ग में सेंध लगाने के लिए एबीवीपी ने अध्यक्ष पद की दौड़ में उत्तराखंड स्थित चंपावत निवासी स्कूल ऑफ संस्कृत के शोधार्थी ललित पांडेय को खड़ा किया है। उपाध्यक्ष पद के लिए असम की गीताश्री बरुआ, महासचिव पद के लिए पहली बार गुर्जर समुदाय से फिजिकल साइंस के शोधार्थी गणेश गुर्जर पर दांव लगाया है। संयुक्त सचिव पद की रेस में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी सेंटर फॉर स्टडीज इन साइंस पॉलिसी के शोधार्थी वेंकट चौबे को खड़ा किया है।

वामपंथी एकता पैनल (आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई, डीएसएफ)
अध्यक्ष : एन. साई बालाजी 
उपाध्यक्ष : सारिका चौधरी 
महासचिव : एजाज अहमद राठेर 
संयुक्त सचिव : अथूरा जयदीप 

एबीवीपी पैनल
अध्यक्ष : ललित पांडेय 
उपाध्यक्ष :  गीताश्री बरुआ 
महासचिव : गणेश गुजर 
संयुक्त सचिव : वैंकट चौबे 

बापसा पैनल:  
अध्यक्ष : थालापल्ली प्रवीण 
उपाध्यक्ष : पूरनचंद नायक  
महासचिव : विश्वंभर नाथ प्रजापति 
संयुक्त सचिव : कनकलता यादव 

एनएसयूआइ पैनल
अध्यक्ष : विकास यादव 
उपाध्यक्ष :  लीजे के. बाबू 
महासचिव : मोहम्मद मोफिजुल आलम 
संयुक्त सचिव : नगुरंग रीना

हॉस्टल, सीट, सुरक्षा के मुद्दे पर मांग रहे वोट

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के चलते कैंपस की दीवारें इन दिनों नारों से अटी पड़ी है। फ्रीडम वॉल पर आइसा, एसएफआई, डीएसएफ, एबीवीपी, एनएसयूआई, एआईएसएफ आदि संगठन अपने मुद्दे उकेर कर छात्रों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कैंपस में पोस्टर-बैनर के इस्तेमाल पर पाबंदी के चलते इस बार दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से संगठन वोटरों को रिझा रहे हैं। जबकि कैंपस के मुद्दों में हॉस्टल की कमी, पीएचडी व एमफिल में सीट कटौती, कुलपति के फैसलों से लेकर सुरक्षा का मुद्दा छाया हुआ है।

कैंपस में इन दिनों छात्रसंगठन डोर टू डोर, सोशल मीडिया, क्लास रूम, लाइब्रेरी व ढाबा आदि के माध्यम से मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनाने में लगे हैं। कैंपस में स्टूडेंट मार्च या कार्यक्रमों के माध्यम से चुनावी मुद्दों को उठाया जा रहा है। एबीवीपी व एनएसयूआई छात्रसंघ के बहाने वामपंथी छात्र संगठनों पर काम न करने का निशाना साध रहा है तो वापमंथी संगठन मोदी व बीजेपी के बहाने एबीवीपी के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं।

देर शाम को विभिन्न हॉस्टल में आयोजित प्री इलेक्शन बैठक का दौर जारी है, जहां मतदाताओं को जेएनयू के नाइट कल्चर के साथ वोट के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वहीं, छात्र संगठनों ने प्रत्याशियों के नाम शार्ट लिस्ट करने शुरू कर दिए हैं।

जबकि हॉस्टल, ढाबा व कैंपस में मेल-मिलाप का कार्यक्रम भी तेजी पकड़ चुका है। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त सचिव व एबीवीपी पदाधिकारी सौरभ शर्मा के मुताबिक, कैंपस में हॉस्टल सीट की कमी है। इस  मुद्दे पर वामपंथी छात्र संगठनों को जवाब देना होगा। कैंपस में छात्र हित के लिए कोई नई योजना शुरू नहीं की गयी है। 

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