जेएनयू छात्रा से रेप मामले में पुलिस को कड़ी फटकार, कोर्ट ने मांगा जवाब
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जेएनयू की पीएचडी छात्रा से दुष्कर्म मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल न करने पर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी समेत कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है क्यों न इस लापरवाही के लिए पुलिस पर जुर्माना लगाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।
पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार शर्मा ने मामले में आरोपों पर बहस में इस बात पर गौर किया कि पुलिस ने फोरेंसिक रिपोर्ट के बिना ही आरोपी अनमोल रतन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
पुलिस को दाखिल करनी थी चार्जशीट
अदालत ने इस मामले में संबंधित जांच अधिकारी, एसएचओ, एसीपी व डीसीपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न पुलिस पर जुर्माना लगाया जाए। कोर्ट ने कहा भविष्य में ऐसी गलती होने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस ने इस मामले में सितंबर माह में चार्जशीट दाखिल की थी लेकिन उसमें फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं थी। पुलिस ने कहा था कि पीड़िता व आरोपी के मोबाइल की कॉल डिटेल, फिंगरप्रिंट व अन्य दूसरी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कोर्ट में पेश कर देगी।
ऐसे मामले में पुलिस अधिकारियों के साथ डीसीपी को कई बार चेतावनी भी दी गई है लेकिन ऐसा लगता है कि वह स्पीडी ट्रायल के मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं देते। पेश मामले में आरोपी अनमोल रतन की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई नहीं हुई क्योंकि उसके वकील पेश नहीं हो सके।