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बुलंदशहरः दुष्कर्म के दोषी को 83 दिन में सजा, 20 साल का कारावास
Wed, 16 Sep 2020 06:25 AM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 06:25 AM IST
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ऐतिहासिक फैसला...
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद के डिबाई थाना क्षेत्र में 11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में वारदात के बाद मात्र 83 दिनों में ऐतिहासिक फैसला आया है। अपर जिला व सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सो अधिनियम) वीरेंद्र कुमार तृतीय ने आरोपी चंद्रपाल सिंह को दोषी मानते हुए 20 वर्ष सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
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वहीं, जानकारों के अनुसार इस प्रकार के अपराध में आरोपियों को जल्द सजा मिलने से अपराध पर अंकुश लग सकेगा। लोगों ने अदालत के निर्णय पर खुशी जताई है। विशेष लोक अभियोजक पास्को अधिनियम सुनील कुमार शर्मा और विजय कुमार शर्मा ने बताया कि गत 25 जून 2020 को डिबाई कोतवाली में पीडि़त पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें उसने बताया था कि 24 जून की देर रात उसकी 11 वर्षीय पुत्री घर के बाहर चबूतरे पर सो रही थी।
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उनका दूर का रिश्तेदार चंद्रपाल सिंह पुत्र गोधी सिंह निवासी गांव डिडौरा विश्वानपुर (थाना छतारी) उनकी पुत्री को उठाकर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। मामला सेशन सुपुर्द होने पर विचारण के लिए अपर जिला व सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सो अधिनियम) वीरेंद्र कुमार तृतीय के समक्ष आया। पुलिस ने मामले के त्वरित निस्तारण के लिए मजबूत पैरवी की। न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार के समक्ष सभी गवाहों के बयान दर्ज हुए।
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न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर आरोपी चंद्रपाल को दोषी पाया। न्यायाधीश ने मंगलवार को मात्र दो माह 20 दिन की अवधि के अंदर अभियुक्त चंद्रपाल को 20 साल की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इस तरह जल्द मिली आरोपी को सजा एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने भी मामले में प्रेसवार्ता की। उन्होंने बताया कि गत 24 जून की रात को वारदात के बाद परिजनों ने 25 जून को एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में आरोपी को नाम सामने आने पर पुलिस ने जांच पड़ताल की और दस दिन के भीतर यानि तीन जुलाई को ही चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में फाइल कर दी थी। यह पूरा मामला उसके बाद न्यायालय में 28 जुलाई को ट्रायल पर आया था। जिसमें डिबाई सीओ वंदना शर्मा ने बेहतर पैरवी की।
मामले में कोर्ट में कुल 24 तारीखें पूरे ट्रायल के दौरान लगीं। इस दौरान अधिकतर तारीखों पर वह न्यायालय पहुंची। गत 11 सितंबर की तारीख को आरोप तय हो चुके थे और15 सितंबर को सजा सुनाई जा सकी है।
जनपद के इतिहास में पहली बार हुआ फास्ट ट्रायल गौरतलब है कि जनपद में कि सी भी मामले में न्यायालय द्वारा इतना फास्ट ट्रायल का यह पहला मामला है। जबकि, वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते आए दिन न्यायालय में कार्य बंद रहता है। इस फैसले की विशेषज्ञ भी सराहना कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि न्यायालय के इस फैसले से अपराधियों में भय व्याप्त होगा। साथ ही लोगों का न्यायालय पर भरोसा भी बढ़ेगा।
बोले अधिवक्ता...
यह न्याय पालिका की जीत है। लोग न्यायपालिका पर पूरा विश्वास करते हैं, इसका कारण समझना है तो एडीजे तृतीय वीरेंद्र कुमार द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले की बानगी को देखा जा सकता है। निष्पक्ष और त्वरित न्याय मिलने से अपराधियों में भय व्याप्त होगा।
- ब्रूनो भूषण, अधिवक्ता
दस दिन में पुलिस ने चार्जशीट फाइल की, 24वीं तारीख पर आरोपी को सजा सुनाया जाना ऐतिहासिक फैसला है। इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों का विश्वास और भी मजबूत होगा। पुलिस को महिला अपराध से जुड़े सभी मामलें में मजबूत पैरवी कर इसी तरह से कोर्ट में पेश करना चाहिए। जिससे अपराधियों के बीच भी एक संदेश जाए।
- रेखा शर्मा, अधिवक्ता