डीयू लॉ फैकल्टी : हिंदुस्तान में सबका डीएनए एक है: सुब्रहमण्यम स्वामी
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रहमण्यम स्वामी का कहना है कि हिंदुस्तान में सबका डीएनए एक है। देश को बांटने के प्रयास से बचना चाहिए। देश में कुछ अंकुश है जिन्हें मानना होगा।
वाद-विवाद, शास्त्रार्थ, लोगों के मनवाने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण में बहस करने का प्रयास करना चाहिए। मंदिर हमारी आस्था से जुड़ा हुआ है। मंदिर को कोई नहीं तोड़ सकता है। मस्जिद जो है वह नमाज पढने की जगह है।
डीयू लॉ फैकल्टी में शुक्रवार को सेमिनार आयोजित किया गया। भारतीय संविधान में बोलने की स्वतंत्रता पर आयोजित इस सेमिनार में बोलते हुए स्वामी ने कहा कि हम एक-एक रक्त बूंद से लोकतांत्रिक देश हैं। हमें लोकतंत्र और सहनशीलता सिखाने का प्रयास किसी को नहीं करना चाहिए।
देश में टुकड़े करने की बात नहीं की जा सकती है। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत पढने का प्रयास करें। यह बोलने की स्वतंत्रता का हिस्सा है। हम संस्कृत की बात करते हैं तो कहते हैं कि यह हिंदुत्व है। संस्कृत को हिदुंत्व से जोड़ा जाता है।
यह सही नहीं है। वामंपथियों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि बस मैं इतना कहना चाहूंगा कि चीन जाकर यह कहिए कि कोई भी महिला प्रधानमंत्री यहां नहीं बना है। बस फिर आप वापस नहीं आ सकते। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह समाज को संयम के साथ सुधार सकते हैं।
यह विश्वास लोगों में जगाना आपका काम है। इस अवसर पर पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी व सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
उल्लेखनीय है कि यह सेमिनार बीते सप्ताह आयोजित होना था लेकिन इसे रद कर दिया गया था। आज इस सेमिनार के समय कैंपस छावनी में तब्दील था, पुलिसकर्मी चैकिंग के बाद ही छात्रों को प्रवेश दे रहे थे।