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DU कॉलेजों ने प्रिंसिपल पोस्ट के निकाले विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 21 Apr 2017 08:33 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विश्वविद्यालय में लंबे समय से लगभग दो दर्जन कॉलेज बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं। अब इनमें से सात कॉलेजों ने प्रिंसिपल के पद स्थायी रुप से भरने के लिए विज्ञापन निकाले हैं। इन कॉलेजों पर आरोप लग रहा है कि सात कॉलेजों में किसी एक कॉलेज ने भी एक भी पद आरक्षित वर्ग को नहीं दिया है। ऐसे में डीयू की एकेडमिक काउंसिल केसदस्य ने इस संबंध में एससी-एसटी की संसदीय समिति को एक पत्र लिखा है।
एकेडमिक काउंसिल सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने बताया कि जिन कॉलेजों के विज्ञापन निकाले गए हैं उनमें स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्स, गार्गी कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आट्र्स एंड कॉमर्स, रामलाल आनन्द कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज के अलावा जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज हैं।
प्रो सुमन का कहना है कि यदि दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण देती है तो भारत सरकार की आरक्षण नीति और डीओपीटी के निर्देशानुसार डीयू को पहले 80 कॉलेजों के हिसाब से एससी-12 पद, एसटी 06 पद, ओबीसी 22 व विकलांगों के 3 पद प्रिंसिपल के बनते हैं। लेकिन यूजीसी ने अभी केवल एससी-एसटी को ही आरक्षण दिया है।
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उन्होंने बताया कि बीते साल संसदीय समिति ने संसद में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रिंसिपल के पदों में आरक्षण ना देने पर असंतुष्ट है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रिंसिपलों के पदों में भी आरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जल्द ही एससी-एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम संसदीय समिति के चेयरमैन से मिलेंगे और तुरंत हस्तक्षेप कर इन पदों को बिना आरक्षण दिए ना भरने के लिए कहेंगे।
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एकेडमिक काउंसिल सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने बताया कि जिन कॉलेजों के विज्ञापन निकाले गए हैं उनमें स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्स, गार्गी कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आट्र्स एंड कॉमर्स, रामलाल आनन्द कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज के अलावा जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज हैं।
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प्रो सुमन का कहना है कि यदि दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रिंसिपल के पदों पर आरक्षण देती है तो भारत सरकार की आरक्षण नीति और डीओपीटी के निर्देशानुसार डीयू को पहले 80 कॉलेजों के हिसाब से एससी-12 पद, एसटी 06 पद, ओबीसी 22 व विकलांगों के 3 पद प्रिंसिपल के बनते हैं। लेकिन यूजीसी ने अभी केवल एससी-एसटी को ही आरक्षण दिया है।
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उन्होंने बताया कि बीते साल संसदीय समिति ने संसद में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रिंसिपल के पदों में आरक्षण ना देने पर असंतुष्ट है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रिंसिपलों के पदों में भी आरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जल्द ही एससी-एसटी ओबीसी टीचर्स फोरम संसदीय समिति के चेयरमैन से मिलेंगे और तुरंत हस्तक्षेप कर इन पदों को बिना आरक्षण दिए ना भरने के लिए कहेंगे।