कोरोना महामारी और ऑनलाइन क्लास का तनाव दूर करेगा 'मनोदर्पण', केंद्र ने जारी की पहली मनोवैज्ञानिक गाइडलाइन

सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Jul 2020 12:04 PM IST
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रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो)
रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

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सार

- केंद्र सरकार ने पहली मनोवैज्ञानिक गाइडलाइन जारी की, एनसीईआरटी के काउंसलर देंगे टिप्स
- योग, इंडडोर गेम्स, अभिभावकों संग मस्ती तो फोन पर दादा-दादी या नान-नानी से बात करने की भी सलाह

विस्तार

वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते पिछले चार महीनों से घरों के अंदर बंद और ऑनलाइन क्लास से छात्रों का तनाव अब 'मनोदर्पण' दूर करेगा। केंद्र सरकार ने छात्रों और अभिभावकों की दिक्कतों को समझते हुए पहली बार मनोवैज्ञानिक गाइडलाइन जारी की है। इसके माध्यम से पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को दुरुस्त किया जाएगा।
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यदि किसी छात्र को तनाव के चलते दिक्कत आ रही है तो उसको एनसीईआरटी के विशेष काउंसलर ऑनलाइन दूर करेंगे। यह मनोवैज्ञानिक गाइडलाइन मनोदर्पण मंगलवार को जारी किया गया।  इसके लिए विशेष टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है, जोकि इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पॉस सिस्टम (आईवीआरएस)पर आधारित है।
सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मनोदर्पण गाइडलाइन स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें स्कूल और उच्च शिक्षा के छात्रों के लिए अगल-अलग सुझाव होंगे। क्योंकि दोनों के तनाव में बेहद अंतर है।
मनोदर्पण के तहत देश के सभी राज्यों, सीबीएसई बोर्ड, केंंद्रीय विद्यालय, नवोदय समेत उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र भी काउंसलर को फोन करक मदद मांग सकेंगे। फिलहाल एनसीईआरटी के 270 काउंसलर को ट्रेनिंग का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा अन्य काउंसलर को भी जोड़ा गया है।

-योग, इंडोर गेम को बढ़ावा:
गाइडलाइन में योग और इंडोर गेम को बढ़ावा दिया गया है। इसके अलावा अभिभावकों को तनाव समझने के टिप्स भी होंगे, ताकि उन्हें पता लग सकते हैं कि बच्चा तनाव में है। इसके अलावा बच्चों को उनके दादा-दादी, नाना-नानी से फान के माध्यम से बातचीत का भी सुझाव दिया गया है। इससे बच्चे और घर की इस सबसे पुरानी पीढ़ी का तनाव दूर होगा। क्योंकि दोनों ही इस समय हालात से डर रहे है।

-तनाव के मुख्य यह है कारण:
स्कूलों में पढऩे वाले छात्र अभी कोविड-19 महामारी को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें पहली बार इतने लंबे समय के लिए घरों के अंदर रहना पड़ रहा है। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेज से भी वे थक रहे हैं। इसके चलते उनका तनाव अलग है। स्कूलों में पढऩे वाले छोटी उम्र के बच्चों को समझाना अभिभावकों को भी परेशान कर रहे है।  छात्र पहली बार इतना लंबे समय तक घरों में बंद हैं। सबसे बड़ा कारण है कि महानगरों और शहरों में एक बड़ी आबादी एक या दो कमरों के घरों में रहती है। ऐसे में छात्र की दुनिया वहीं सिमटकर रही गई है। इसके अलावा संयुक्त की बजाय छोटे परिवार के कारण बच्चे किसी केसाथ अपनी बात नहीं कह  पा रहे हैं। वहीं, उच्च शिक्षण संस्थानों केछात्र अपने भविष्य, रोजगार और पढ़ाई को लेकर तनाव में है। इसके अलावा भी कई अन्य कारण हैं।
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