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उलेमाओं ने की बच्चों को तालीम दिलाने की वकालत

Sat, 17 Dec 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sat, 17 Dec 2016 12:05 AM IST
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ulemas requested for child education
- फोटो : amar ujala

दो दिवसीय कार्यक्रम में उलेमाओं ने तालीम पर जोर देने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि अभिभावक अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षित करें और लडका-लडकी में कोई फर्क न समझा जाऐ।

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ये बातें बड़कली चौक पर समाज सुधार पर आयोजित कार्यक्रम में अल-अमन इस्लामिक दावा सेंटर के के अध्यक्ष मौलाना हकीमुद्दीन सद्दीकी सनावली ने कही। उन्होंने कहा किदीनी और समाज सुधार लाने में ईमाम अहम किरदार निभाते है।
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इसलिए नबी ने काबा और मदीना में सबसे पहले मस्जिद की तामीर की। भारत को विश्व गुरू बनाने में गंगा जमुनी तहजीब का कोई मुकाबला नहीं है। कार्यक्रम में इस दौरान हाफिज मोहमद दाउद ने कहा कि इस्लामिक इतिहास की पहली मस्जिद का मकसद यही था कि दुनिया में इालाश और ईबादत कायम रहे। डॉ. ईशा व अनीशखां तिजारा ने अपने भाषण में कहा कि बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए आगे लाने की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि पिपरोली गांव में एक मस्जिद का उद्घाटन किया है। जिसमें समाज सुधार कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस मुबारक मौके पर हरियाणा और राजस्थान के उलेमाओं और बुद्धिजीवियों ने अपनी तकरीर रखी। इस कार्यक्रम में कहा गया कि दीनी तालीम के अलावा दुनियामी तालीम व्यक्तिगत फायदों के लिए आवश्यक है। 

लोगों ने बैंक के काम को सराहा
नगीना। कस्बेवासी सुबेदार खां, हाजी सुलेमान, सोहराब लबरदार ने बताया कि सैंट्रल बैंक ऑफ इंड़िया के मैनेजर, कैशियर, गार्ड़ व अन्य कर्मचारियों का सहयोग बुर्जगों के साथ रहा है। बैंक के सामने सुबह से देर शाम तक भी भले ही लाईन नहीं टूटी हो किंतु जो लोग लाईन में लगे उन सबको निपटाकर ही कर्मचारियों ने दम लिया।


इसी बात से खुश होकर लोगों ने कहा है कि इन बैंकों की कार्यशैली से दूसरे बैंकों को प्ररेणा लेनी चाहिऐ। आसिफ अली ने बताया लोगों की परेशानियां काफी रही है। ग्रामीण अल सुबह ही कतारों में खड़े हो जाते है और देर रात तक खडे़ रहते थे। ऐसे में उनको संतुष्ट करना बड़ी चुनौती रही है।

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