यूजीसी नोटिफिकेशन मामला : बीए व एमए प्रोग्राम के दाखिले पर भी पड़ेगा असर
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में यूजीसी नोटिफिकेशन 2016 के तहत एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम में सीट कटौती पर चल रहे प्रदर्शन का असर अब बीए और एमए प्रोग्राम के दाखिले पर भी पड़ने वाला है।
देशभर के विभिन्न राज्यों से जेएनयू में शैक्षणिक सत्र 2017-18 में बीए, एमए, एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लेने की चाह रखने वाले छात्रों को इस बार दाखिला मिल पाएगा या नहीं, इस पर अब संशय है।
क्योंकि जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे ने भी विश्वविद्यालय प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि इस नोटिफिकेशन के चलते एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम में सीट कटौती हुई तो फिर अन्य विकल्पों पर काम किया जाएगा, लेकिन नोटिफिकेशन 2016 के तहत एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम में सीट कटौती किसी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी।
दोनों तरफ से है दिक्कत
बता दें कि जेएनयू वर्ष 1982-83 में भी हॉस्टल समेत अन्य मुद्दों के चलते छात्रों ने प्रशासनिक घेराव किया था, जिसके चलते दाखिला प्रक्रिया रोक दी गई थी। हालांकि इस बार मुद्दा बेशक अलग है लेकिन छात्रों का विरोध वैसा ही है।
जेएनयू ही एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां देश के कोने-कोने से छात्र आजादी के साथ कम खर्चे पर उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं। हालांकि, इस नियम के बाद दूरदराज से आने वाले ऐसे छात्रों के लिए एमफिल या पीएचडी की डिग्री लेना मुश्किल हो जाएगा।
जेएनयू में दाखिला प्रक्रिया फरवरी के पहले या दूसरे हफ्ते में शुरू हो जाती थी। इस बार प्रशासनिक भवन पर छात्रों का कब्जा होने के चलते विश्वविद्यालय प्रबंधन दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाएगा।
अदालत में मामला जाने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्वयं दो मार्च तक दाखिला आवेदन पत्र जारी न करने की बात कही है। छात्रसंघ का कहना है कि इतिहास दोहराया जा सकता है, लेकिन बीए और एमए प्रोग्राम में दाखिला विंडो ओपन होने से अन्य छात्रों को लाभ मिलेगा तो दूसरी और एमफिल और पीएचडी प्रोग्राम में सीटें कम हो जाएंगी। ऐसे में दिक्कत दोनों तरफ है। छात्रसंघ अपनी जिम्मेदारी दोनों तरफ के छात्रों के लिए निभाएगा।