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जेएनयू: तीन छात्रों का आरोप, धमकी व तनाव के चलते परीक्षा छोड़ी 

Fri, 04 Nov 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 04 Nov 2016 12:21 AM IST
सार

धमकी  व तनाव के चलते हमने अपनी सेशनल परीक्षा छोड़ दी है। जबकि यह परीक्षा न देने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन अगले सेमेस्टर हमें कैंपस से बाहर कर सकता है।

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three students leaved exam after najeeb ahmad in jnu
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धमकी  व तनाव के चलते हमने अपनी सेशनल परीक्षा छोड़ दी है। जबकि यह परीक्षा न देने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन अगले सेमेस्टर हमें कैंपस से बाहर कर सकता है। छात्रसंघ व नजीब के परिवारों के आरोपों के चलते हमारे परिवार सदमे हैं और हम पर पढ़ाई छोड़ घर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।
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यदि कल हमारे साथ कोई हादसा हो जाता है तो इसका कारण जेएनयू छात्रसंघ व जेएनयू शिक्षक यूनियन होगी। क्योंकि कैंपस, हॉस्टल व क्लासरूम में छात्र व शिक्षक हमें लगातार धमकी व परेशान कर रहे हैं।
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जेएनयू कैंपस में लापता नजीब से मारपीट के आरोपी तीन छात्र विक्रांत, अंकित व सुुनील ने संयुक्त प्रेस वार्ता में वामपंथी छात्रों व शिक्षकों पर मानसिक तनाव देने का आरोप लगाते हुए जान को खतरा बताया है।
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जौनपुर (उत्तर प्रदेश ) निवासी सुनील, सीतामड़ी निवासी विक्रांत व औरंगाबाद के अंकित बीए रशियन प्रोग्राम में तीसरे वर्ष के छात्र हैं और माही मांडवी हॉस्टल में रहते हैं। तीनों छात्रों की इन दिनों सेशनल परीक्षा (साल में तीन सेशनल परीक्षा) चल रही है और परीक्षा में पास होना अनिवार्य होता है।

नजीब की मां ने हमें दोषी करार दिया

three students leaved exam after najeeb ahmad in jnu
सुनील के मुताबिक, वामपंथी छात्रों के आरोपों के चलते नजीब का परिवार भी हमें ही दोषी मान रहा है। जबकि विश्वविद्यालय प्रबंधन की जांच रिपोर्ट में हमें क्लीन चिट मिल चुकी थी। इससे छात्रों व शिक्षकों के आरोपों के चलते हमारे परिवार सदमे हैं। वहीं, विक्रांत का कहना है कि सब नजीब की मां की तरह मेरी भी मां सदमे हैं और बीमार है।

मैं भी पिछड़ी जाति का हूं, लेकिन छात्रसंघ के अध्यक्ष के अलावा किसी अन्य ने इस पूरे मामले पर हमारा पक्ष नहीं सुना। बिना सच जाने कोई हमें कैसे अपराधी मान सकता है। ऐसे गवाह सामने आ रहे हैं, जोकि मारपीट के दौरान घटनास्थल पर थे ही नहीं।

ऐसे में इनके सामाजिक न्याय की लड़ाई कहां खो जाती है। वामपंथी संगठनों के अलावा नजीब की मां हर समय कैंपस में हमें दोषी करार दे रही हैं। ऐसे में हम तनाव में आकर आत्महत्या भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी बिना जांच करवाएं अपने भाषण में हमें दोषी करार कर चले गए।
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