हिंदूराव अस्पताल में तीन नवजात की मौत, एमसीडी कमिश्नर तक पहुंची बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिवाली की रात राजधानी के हिंदूराव अस्पताल में एक साथ तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में जांच पूरी हो चुकी है। तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने 15 दिन में जांच पूरी करने के बाद सील बंद रिपोर्ट उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर को सौंप दी है। हालांकि अभी तक इस मामले में कड़ा रुख अपनाने वाले निगम ने अब तक रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं किया है? ये बड़ा सवाल निगम स्वास्थ्य विभाग को भी सता रहा है।
इस मामले में जब कमिश्नर कार्यालय में संपर्क किया गया तो जवाब नहीं मिला, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जांच में डॉक्टरों का पक्ष मजबूत देखने को मिला है। वहीं, निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डीएस सेठ बताते हैं कि जांच पूरी हो चुकी है। चूंकि मामला सीधेतौर पर निगम कमिश्नर से जुड़ा है। इसलिए उन्होंने सीलबंद रिपोर्ट को कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचा दिया है। इससे ज्यादा उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
बता दें कि 18 अक्तूबर की रात हिंदुराव अस्पताल में तीन गर्भवती महिलाओं को दाखिल किया गया। जैसा कि परिजनों ने बताया कि इलाज में लापरवाही बरती गई है। जूनियर डॉक्टरों ने महिलाओं की गंभीर स्थिति होने के बाद भी इलाज नहीं किया। जिसकी वजह से जनम के बाद ही तीनों नवजात बच्चों की मौत हो गई।
वहीं प्रारंभिक जांच में एमसीडी को डॉक्टरों ने बताया कि इन बच्चों की मौत गर्भ में ही हुई है। साथ ही परिजनों के आरोप को भी इन्होंने नकारा है। उत्तरी एमसीडी के अधिकारी डीके सेठ ने बताया कि बच्चों की मौत और हंगामे की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल से जवाब मांगा गया था। जिसके बाद ही दो डॉक्टर को सस्पेंड किया गया है।
तीन दिन की जांच 15 दिन में पूरी
मामले की जांच कमेटी का गठन करते वक्त एमसीडी ने बुधवार तक जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन डॉक्टरों को इस मामले की हकीकत तक जाने में करीब 15 दिन का वक्त लग गया। इस दौरान एमसीडी अधिकारी भी मामले से जुड़ी जानकारी देने से बचते रहे।
एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि पहले तो तत्काल एक्शन लेते हुए निगम ने वाहवाही लूट ली। लेकिन जब उन्हें पता चल रहा है कि फैसला डॉक्टरों के खिलाफ नहीं है तो अब सब चुप्पी साधे हुए हैं। डॉक्टर का कहना है कि अगर वाकई कोई दोषी है तो एमसीडी कमिश्नर को आगे आकर इसका खुलासा करना चाहिए। अन्यथा सार्वजनिक रुप से माफी भी मांगनी चाहिए।