फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   tamilndu students getting more admission in du and srcc

डीयू में बढ़ रहा है एक राज्य और बोर्ड का दबदबा, एसआरसीसी में 80% छात्र एक ही राज्य से

Wed, 06 Jul 2016 05:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 06 Jul 2016 05:02 PM IST
विज्ञापन
tamilndu students getting more admission in du and srcc
डीयू दाखिला - फोटो : कुमार संजय
कॉमर्स के लिए सबसे ज्यादा तलाशा जाने वाला कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं जो किसी को भी सोचने को मजबूर कर सकते हैं।
विज्ञापन


एसआसीसी के बीकॉम कोर्स में एडमिशन के लिए जारी की गई पहली कटऑफ लिस्ट में सबसे ज्यादा छात्र तमिलनाडु से आए हैं। कॉलेज के पास अभी तक ऐसा कोई सरकारी आंकड़ा तो जारी नहीं किया है लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये संख्या 80 प्रतिशत है। 
विज्ञापन


इस साल भले ही छात्रों की इस संख्या को लेकर चर्चा हो रही है लेकिन तमिलनाडु और केरल के छात्रों की डीयू और एसआरसीसी में उपस्थिति 2010 से लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बारे में एसआरसीसी के पूर्व प्रिंसिपल पीसी जैन का कहना है कि कट ऑफ दो बार 100 प्रतिशत जा चुकी है, कॉलेज में बीकॉम का एक सेक्शन तमिलनाडु के छात्रों के लिए ही है।

2010 से बढ़ा है ये ट्रेंड

tamilndu students getting more admission in du and srcc
डीयू एडमिशन - फोटो : अमर उजाला
2010 में जब कटऑफ 100 प्रतिशत गई थी तो पहली बार केरल की लड़की का सभी विषयों में 100 प्रतिशत परिणाम आया था, ये मुद्दा तब भी चर्चा में आया था। इसके बाद से ही ज्यादा से ज्यादा छात्र इन राज्यों से ही दाखिला पा रहे हैं।

एक ही राज्य से पढ़ने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या के बारे में बताते हुए प्रिंसिपल जैन कहते हैं कि करीब 10 साल पहले डीयू में दाखिले शुरू होने से पहले वो उत्तर प्रदेश गए थे। उस साल उस राज्य बोर्ड के टॉपर को 84 प्रतिशत अंक मिले थे। किसी ने मुझसे कहा कि ऐसे में यूपी का कोई छात्र डीयू में दाखिला कैसे ले पाएगा।

इस ट्रेंड से क्या हो रहा नुकसान

tamilndu students getting more admission in du and srcc
डीयू एडमिशन - फोटो : अमर उजाला
जैन आगे बताते हैं कि इस होड़ के कारण ही राज्य बोर्ड ने भी ज्यादा अंक देना शुरू कर दिया ताकि छात्रों के 99 से 100 प्रतिशत आ सकें। इस चलन पर चिंता जाहिर करते हुए डीयू के ही एक अध्यापक बताते हैं कि पिछले साल भी तमिलनाडु से बड़ी संख्या में दाखिले हुए थे। नंबरों की इस बढ़ती होड़ के नुकसान की तरफ इशारा करते हुए वो कहते हैं कि बिहार कांड इस चिंताजनक स्थिति का परिणाम है जहां एक ही स्कूल के कई छात्र टॉप कर जाते हैं और बाद में शर्मनाक सच्चाई सामने आती है।

इससे होने वाले दूसरे नुकसान की ओर इशारा करते हुए एसआरसीसी के प्रिंसिपल आरपी रुस्तगी का कहना है कि इससे यूनिवर्सिटी की मूल भावना को भी धक्का पहुंचता है क्योंकि इन संस्‍थाओं का उद्दूश्य एक की कैंपस में ज्यादा से ज्यादा विविधताओं को जगह देना है लेकिन एक ही कॉलेज या राज्य से ज्यादा छात्रों का आना इसमें बाधक बन रहा है। हालांकि इसका कोई आधारिक डाटा उनके पास अभी उपलब्‍ध नहीं है्।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed