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खुलासाः स्कॉलरशिप ने बदली कश्मीर में अलगावादी मानसिकता, खुद को भारतीय कहने लगे हैं छात्र
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 18 Apr 2018 01:13 PM IST
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unrest kashmir
- फोटो : BASIT ZARGAR
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भारत की अनेकता में एकता की विरासत व संस्कृति से मेलजोल कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी और अलगावादी मानसिकता में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरिशप के चलते घाटी के युवाओं को देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का मौका मिल रहा है।
इसके चलते छात्र अब नए भारत के निर्माण में खुद को जोडने लगे हैं। यह खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेंस -स्कूल ऑफ वॉकेशनल एजुकेशन के इस स्कॉलरशिप के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों पर किए गए सर्वे में हुआ है।
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने जम्मू-कश्मीर के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोडने के लिए प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम शुरू की थी। इसमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, मैनेजमेंट समेत जनरल स्ट्रीम में छात्रों को देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले का मौका मिलता है।
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इस स्कीम के तहत छात्र की पढ़ाई, रहना, खाना-पीना समेत अन्य खर्चा भारत सरकार देती है। इस स्कीम से कश्मीरी छात्रों में कितना बदलाव हुआ है, जानने के लिए सर्वे करवाया गया था,ताकि कमियों को दूर किया जा सके।
इस स्कीम में घाटी के करीब 13845 छात्र 27 राज्यों में उच्च शिक्षा ले रहे हैं। विभिन्न राज्यों की संस्कृति, सभ्यता को जानने के बाद अब कश्मीरी छात्र खुद को भारतीय कहने में गुरेज नहीं कर रहे हैं।
नौ राज्यों में दाखिला पहली पसंद
इंजीनियरिंग में छात्रों की पहली पसंद हरियाणा,पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और महाराष्ट्र है। जबकि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक जनरल स्ट्रीम और उत्तर प्रदेश में मेडिकल स्ट्रीम में दाखिला लेना छात्रों की पहली पसंद रही है। युवाओं के दोस्त देश के अन्य भागों के छात्र हैं, जिसके चलते उनके लाइफस्टाइल में बदलाव आया है। वे अब नौकरी के लिए भारत केकिसी भी हिस्से में जाना पसंद करेंगे।
महत्वपूर्ण बिंदू :
- कश्मीर में स्कीम के बारे में ओर अधिक जानकारी के लिए स्कूलों में दसवीं कक्षा के छात्रों, कश्मीर केदूर-दराज के इलाकों, आउट ऑफ स्कूल (बीच में स्कूली शिक्षा छोडने वाले)छात्रों समेत अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए।
- इस स्कीम में उन कश्मीरी विस्थापितों को भी शामिल किया जाए, जोकि आतंकवाद के दौर में घाटी छोड़कर देश के अन्य इलाकों में रह रहे हैं।
- यदि कोई छात्र दाखिला लेने के बाद तय समय में सीट नहीं लेता है तो उसकी जिंदगी वेङ्क्षटग लिस्ट के अगले छात्र को मौका दिया जाए।
- ग्रेजुएशन में डिप्लोमा कोर्स को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन प्लेसमेंट के लिहाज से स्किल डेवलेपमेंट कोर्स भी जुडने चाहिए।
- स्कीम का लाभ लेने के लिए अभी तक पेरेंट्स की आय छह लाख रुपये सालाना रखी गयी है, उसे बढ़ाकर आठ से दस लाख रुपये किया जाए।
कैटेगिरी कितने फीसदी छात्रों ने लिया लाभ
कश्मीर 51 फीसदी
जम्मू 42 फीसदी
लद्दाख 7 फीसदी
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इसके चलते छात्र अब नए भारत के निर्माण में खुद को जोडने लगे हैं। यह खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेंस -स्कूल ऑफ वॉकेशनल एजुकेशन के इस स्कॉलरशिप के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों पर किए गए सर्वे में हुआ है।
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ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने जम्मू-कश्मीर के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोडने के लिए प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम शुरू की थी। इसमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, मैनेजमेंट समेत जनरल स्ट्रीम में छात्रों को देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले का मौका मिलता है।
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इस स्कीम के तहत छात्र की पढ़ाई, रहना, खाना-पीना समेत अन्य खर्चा भारत सरकार देती है। इस स्कीम से कश्मीरी छात्रों में कितना बदलाव हुआ है, जानने के लिए सर्वे करवाया गया था,ताकि कमियों को दूर किया जा सके।
इस स्कीम में घाटी के करीब 13845 छात्र 27 राज्यों में उच्च शिक्षा ले रहे हैं। विभिन्न राज्यों की संस्कृति, सभ्यता को जानने के बाद अब कश्मीरी छात्र खुद को भारतीय कहने में गुरेज नहीं कर रहे हैं।
नौ राज्यों में दाखिला पहली पसंद
इंजीनियरिंग में छात्रों की पहली पसंद हरियाणा,पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और महाराष्ट्र है। जबकि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक जनरल स्ट्रीम और उत्तर प्रदेश में मेडिकल स्ट्रीम में दाखिला लेना छात्रों की पहली पसंद रही है। युवाओं के दोस्त देश के अन्य भागों के छात्र हैं, जिसके चलते उनके लाइफस्टाइल में बदलाव आया है। वे अब नौकरी के लिए भारत केकिसी भी हिस्से में जाना पसंद करेंगे।
महत्वपूर्ण बिंदू :
- कश्मीर में स्कीम के बारे में ओर अधिक जानकारी के लिए स्कूलों में दसवीं कक्षा के छात्रों, कश्मीर केदूर-दराज के इलाकों, आउट ऑफ स्कूल (बीच में स्कूली शिक्षा छोडने वाले)छात्रों समेत अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए।
- इस स्कीम में उन कश्मीरी विस्थापितों को भी शामिल किया जाए, जोकि आतंकवाद के दौर में घाटी छोड़कर देश के अन्य इलाकों में रह रहे हैं।
- यदि कोई छात्र दाखिला लेने के बाद तय समय में सीट नहीं लेता है तो उसकी जिंदगी वेङ्क्षटग लिस्ट के अगले छात्र को मौका दिया जाए।
- ग्रेजुएशन में डिप्लोमा कोर्स को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन प्लेसमेंट के लिहाज से स्किल डेवलेपमेंट कोर्स भी जुडने चाहिए।
- स्कीम का लाभ लेने के लिए अभी तक पेरेंट्स की आय छह लाख रुपये सालाना रखी गयी है, उसे बढ़ाकर आठ से दस लाख रुपये किया जाए।
कैटेगिरी कितने फीसदी छात्रों ने लिया लाभ
कश्मीर 51 फीसदी
जम्मू 42 फीसदी
लद्दाख 7 फीसदी