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छात्रों में नाकामयाबी बर्दाश्त करने की क्षमता घट रही
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:57 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोटा के कोचिंग संस्थानों में प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में जुटे छात्र असफलता को सह नहीं पा रहे हैं। वहां के छात्रों में नाकामयाबी बर्दाश्त करने की क्षमता दिन-प्रतिदिन घट रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज के छात्रों व शिक्षकों की टीम द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आ रही है।
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दस छात्रों व दो शिक्षकों की टीम ने कोटा कोचिंग संस्थान बनाम सुपर-30 का तुलनात्मक अध्ययन किया। अब इस अध्ययन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस इनोवेशन प्रोजेक्ट के मुख्य शिक्षक डॉ. अनुपम ने बताया कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रतियोगिता की दौड़ में कोटा के कोचिंग संस्थानों व सुपर-30 संस्थान पर एक सर्वे किया गया है।
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इस सर्वे में कोटा के नामी कोचिंग संस्थानों के छात्रों से बातचीत की गई। डॉ. अनुपम ने बताया कि असफलता बर्दाश्त करने की क्षमता युवाओं में कम होती जा रही है। युवाओं को यह भय रहता है कि मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में असफल रहने पर दोस्त, परिवार और समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में कुछ छात्र खुदकुशी करने की राह चुन रहे हैं।
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कोटा कोचिंग संस्थान के छात्रों में हाल के वर्षो में आत्महत्या करने की घटनाएं बढ़ी हैं। बीते एक साल पर ही गौर करें तो लगभग डेढ़ दर्जन छात्र खुदकुशी कर चुके हैं। ऐसे में उनकी असफलता की जिम्मेदारी न तो संस्थान लेता है और ना ही शिक्षक।
जबकि सुपर-30 की बात करें तो वहां का कोई छात्र परीक्षा में असफल होता है तो संस्थान के साथ-साथ शिक्षक भी जिम्मेदारी लेता है। इसलिए वहां छात्रों के खुदकुशी करने के मामले नहीं आ रहे हैं। सर्वे में पाया गया कि छात्रों पर घर से दूर रहने का प्रभाव भी पड़ता है।
प्रोजेक्ट से जुड़ी छात्रा श्रेया सिन्हा ने बताया कि सर्वे में ऐसा पाया कि लाखों खर्च करने और मेहनत करने के बाद भी काफी छात्र परीक्षा में कामयाबी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। फिलहाल इस प्रोजेक्ट को अंतिम रुप दिया जा रहा है जिससे कि इसके अध्ययन को डीयू में जमा कराया जा सके।