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वाईएमसीए विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

Sat, 29 Apr 2017 06:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 29 Apr 2017 06:19 PM IST
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 seminar on new education policy in YMCA university
CBSE STUDENTS

वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षण मंडल के सहयोग से नई शिक्षा नीति %अपेक्षाएं और चुनौतियां’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। हरियाणा स्वर्ण जयंति वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सेमिनार के मुख्य वक्ता मंडल के राष्ट्रीय आयोजन सचिव मुकुल कनितकर थे। अध्यक्षता कुलपति दिनेश कुमार ने की।  

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मुख्य वक्ता मुकुल कनितकर ने कहा कि शिक्षा समाज का विषय है। जब तक समाज यह जिम्मेदारी नहीं लेता कि नई पीढ़ी को कैसी शिक्षा देनी है, तब तक शिक्षा को लेकर सरकारी प्रयास अपर्याप्त ही रहेंगे। प्रत्येक राष्ट्र की अपनी नीति व स्वभाव होता है जो विश्व पर एक अपना प्रभाव स्थापित करता है। 
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इस दृष्टि से भारत 'जगत गुरु’ के रूप में खुद को स्थापित करने की क्षमता रखता है। शिक्षा में बदलाव के लिए युवाओं को सेवा भाव से शिक्षा के क्षेत्र में आगे आना होगा। इस दौरान जोर दिया गया कि शिक्षा व्यवस्था का नियंत्रण शिक्षकों व शिक्षाविदों के हाथ में हो। 
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शिक्षा पद्धति के भारतीयकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को शिक्षक केन्द्रित, अध्ययन केंद्रित व रुचिकर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने अनुसंधान गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर बल दिया। 


कुलपति दिनेश कुमार ने कहा कि शिक्षा नीति किसी भी राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए शिक्षा नीति को लेकर समाज की अपेक्षाओं व चुनौतियों पर सभी का मंथन एवं जागरूकता जरूरी है। सेमिनार का संयोजन डॉ सोनिया बंसल ने किया। 

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