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सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों के नए दाखिला नियम देखिए

Sun, 08 Jan 2017 03:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 08 Jan 2017 03:58 PM IST
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नर्सरी दाख‌िला - फोटो : गेटी ‌इमेज

लंबे इंतजार के बाद दिल्ली सरकार ने सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले से संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शनिवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मंजूरी मिलने के बाद 298 स्कूलों में दाखिले के लिए नियम तय कर दिए हैं। दिशा-निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि इन स्कूलों को नेबरहुड(पड़ोस) केआधार पर एक, तीन व छ: किलोमीटर केदायरे में आने बच्चे को दाखिले में प्राथमिकता देनी होगी। सबसे पहले दाखिले में प्राथमिकता एक किलोमीटर में रहने वालों को ही मिलेगी। 

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सरकार ने सरकारी जमीन पर बने स्कूलों केलिए दिशा-निर्देश तय करने संबंधी फाइल को उपराज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था। उपमुख्यमंत्री व मनीष सिसोदिया ने पांच जनवरी को स्पष्ट किया था कि अगले दो से तीन दिन में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। शनिवार दोपहर को  उपराज्यपाल ने फाइल पर अपनी मुहर लगा दी। उपमुख्यमंत्री ने देर शाम ट्विटर पर दिशा-निर्देशों के संबंध में जानकारी दी।
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सिसोदिया ने ट्वीट किया कि सरकार इन स्कूलों में दाखिला संबंधी गाइडलाइंस जारी कर रही है। यह स्कूल एक, तीन व छ: किमी के दायरे में आने वाले बच्चों को पहले दाखिला देंगे। इन स्कूलों को डीडीए ने जमीन देते वक्त शर्त लगाई थी कि यह नेबरहुड(पड़ोस) के बच्चों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकते। सरकार को उम्मीद है कि दिशा-निर्देश से सरकारी जमीन पर चल रहे स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। बताया जा रहा है कि दो बार उपराज्यपाल से चर्चा की गई। जारी किए गए दिशा निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए है। इन दिशा निर्देशों के आधार पर स्कूल अपने दाखिले शुरू कर सकते है। सूत्र बताते है कि सोमवार तक इन स्कूलों के लिए दाखिला शिड्यूल जारी कर दिया जाएगा। इनके लिए आवेदन प्रक्रिया 31 जनवरी  तक जारी रहने की संभावना है।
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फॉर्मूले के मुताबिक यदि किसी स्कूल में 100 सीटें हैं तो 25 फीसदी सीटें आर्थिक पिछड़े वर्ग व वंचित वर्ग को मिलेगी। 75 फीसदी सामान्य वर्ग के लिए होगी। इन सीटों पर सबसे पहले 0 से 1 किमी तक दायरे में आने वाले सभी बच्चों को स्कूलों को दाखिला देना होगा। यदि इस दायरे में दो या तीन भाई बहन एक ही स्कूल में आवेदन करते है तो स्कूल उन्हें दाखिला देने से मना नहीं कर सकता। यदि सीटे कम है और आवेदन ज्यादा आए है तो स्कूल को लॉट्री करनी होगी। 

इसके बाद 1 से 3 किमी केदायरे में आने वाले बच्चों को दाखिला मिलेगा। सीटें बचने पर तीन से 6 किमी दायरे केबच्चों को दाखिला देना होगा। यदि फिर भी सीटें खाली रह जाती हैं तो 6 किमी दायरे के बाहर केसभी बच्चों को दाखिला दे सकेंगे। 

शिक्षा निदेशालय ने जारी दिशा निर्देशों में साफ किया है कि अल्पसंख्यक स्कूल अपनी सीटें आरक्षित रख सकेंगे। हालांकि उन्हें इन सीटों की जानकारी अपनी वेबसाइट के नोटिस बोर्ड पर देनी होगी। अनारक्षित सीटों के दाखिले व जारी किए गए दिशा निर्देशों के साथ ही करेंगे। स्कूल अद्र्घसैनिक बलों, सैन्य कर्मियों, केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रख सकती है। इसकी भी जानकारी वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर देनी होंगी। बाकि सीटों पर दाखिले वह तय किए गए नेबरहूड फॉमूले पर ही करेंगे।


शिक्षा निर्देशालय ने साफ कर दिया है कि कोई भी मैनेजमेट कोटा नहीं होगा। वहीं दिशा निर्देश जारी होने के बाद निजी स्कूल विचार विमर्श करके कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे है। 

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