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किताबों की फोटोकॉपी बेचने पर रोक से इंकार, हाईकोर्ट में दायर है याचिका
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:31 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : file photo
हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पुस्तकों की फोटोकॉपी व पेजों को बेचने की इजाजत संबंधी फैसले पर रोक से इंकार कर दिया है। तीन अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने हाईकोर्ट के ही सिंगल जज के फैसले को दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है।
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न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग व न्यायाधीश प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने प्रकाशकों की अपील पर सुनवाई 29 नवंबर तय की है। खंडपीठ ने उस तर्क को खारिज कर दिया कि सिंगल जज के 16 सितंबर को दिए फैसले पर रोक लगाई जाए।
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फिलहाल, कोर्ट ने डीयू स्थित पुस्तकों की फोटोकॉपी बेचने वाले कियोस्क के मालिक को अपने खातों का पूरा रिकार्ड रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर नियमित सुनवाई कर निर्णय देगी।
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बता दें कि न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने डीयू में स्थित उस कियोस्क पर लगाए गए प्रतिबंध को भी हटा दिया था, जहां से छात्र इन तीन अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों की पाठ्य-पुस्तकों के टेस्ट बुक की प्रतियां प्राप्त करते थे।
कोर्ट ने इससे पहले नवंबर 2012 को नार्थ कैंपस स्थित दिल्ली स्कूल फॉर इकनॉमिक्स स्थित इकोनिक रामेश्वरी फोटो कॉपी कियोस्क पर रोक लगा दी थी। अदालत ने फोटोकॉपी करवाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रेस, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, टेलर व फ्रांसिस द्वारा दायर याचिका खारिज की थी।
कॉपीराइट में फंसा मामला
डीयू ने फोटो कापी करने के निर्णय को उचित ठहराते हुए तर्क रखा था कि छात्रों द्वारा फोटोकॉपी दस्तावेजों के प्रयोग से उनकी उचित शैक्षिक आवश्यकताएं पूरी होती हैं। इसे कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि डीयू की मिलीभगत से कियोस्क फोटोकॉपी कर कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन कर रहा है। इस प्रकार के रवैये से उनको वित्तिय नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि छात्रों ने उनकी पुस्तकों को खरीदना बंद कर दिया है। उन्होंने तर्क रखा कि सिंगल जज कॉपी राइट एक्ट के प्रावधानों को समझने में असफल रहे हैं।