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मान्यता नियम के चलते निजी स्कूलों की कमी, हाईकोर्ट से सर्कुलर रद्द करने का आग्रह

Mon, 26 Sep 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Sep 2016 12:07 AM IST
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Recognized private schools because of the lack of rules, asked to cancel the court circular
कोर्ट

गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि मान्यता प्रदान करने संबंधी तय दिशा निर्देश के कारण ही राष्ट्रीय राजधानी में माध्यमिक स्तर के निजी स्कूलों की कमी है। 

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इसी के चलते शिक्षा के अधिकार का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है ।मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष एसोसिएशन के अधिवक्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के 22 मार्च 2013 के सर्कुलर में स्कूल की मान्यता के लिए बड़ी भूमि जरूरी है। 
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पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक प्राथमिक स्कूलों के लिए मान्यता हासिल करने के लिए 200 वर्ग गज का क्षेत्र जरूरी है। वहीं आठवीं कक्षा तक माध्यमिक स्तर के स्कूलों के लिए 837 वर्ग गज जगह जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि मान्यता के इस नियम की वजह से कक्षा पांच के बाद 35 हजार सीटों की कमी हो रही है। इस तरह शिक्षा के अधिकार का पालन किस तरह किया जा सकता है। कई छात्र कक्षा पांच के बाद सीटों की कमी की वजह से स्कूल छोड़ देते हैं।


दिल्ली सरकार ने यह कहकर अपने फैसले का बचाव किया कि कक्षा छह से कक्षा आठ तक पढ़ने वाले बच्चों के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है। 

इसलिए माध्यमिक स्तर के स्कूलों के लिए बड़ा क्षेत्र होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत फैसला शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए विशेषज्ञों की राय के आधार पर लिया गया था ।खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एसोसिएशन की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। 

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