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अपनी इच्छानुसार फीस बढ़ोत्तरी नहीं कर सकेंगे निजी स्कूल, कोर्ट ने खारिज की याचिका 

Wed, 27 Jul 2016 08:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 27 Jul 2016 08:05 PM IST
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Private school fees will not be increased at will, the court dismissed the petition
कोर्ट - फोटो : file photo

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले गैर सहायता प्राप्त स्कूल प्रशासन दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय की मंजूरी लिए बिना अपनी इच्छानुसार फीस में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकते। 

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हाईकोर्ट ने स्कूलों की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते उन्हें झटका दे दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके पहले दिए फैसले में पुनर्विचार का कोई आधार नहीं है।
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मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही मॉडर्न स्कूल मामले में इस मुद्दे पर अपना रूख स्पष्ट कर चुका है। खंडपीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सभी स्कूलों पर लागू होता है और इस फैसले के बाद उनके अपने फैसले पर भी पुनर्विचार की कोई गुंजाइश नहीं है।
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खंडपीठ ने कहा कि उन्होंने 19 जनवरी को इस मुद्दे पर विस्तृत फैसला दिया था और उसपर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है और स्कूलों को उसका पालन करना ही होगा।

स्कूल एसोसिएशन का तर्क किया खारिज

Private school fees will not be increased at will, the court dismissed the petition
अदालत - फोटो : file

स्कूलों की एसोसिएशन ने तर्क रखा था कि इस फैसले से उनको मिले स्वायत्ता के अधिकार का हनन होगा। यह निर्णय गलत है और इस पर पुनर्विचार किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा था कि सरकार ने भी विज्ञापन जारी कर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है, ऐसे में सरकार को कार्रवाई से रोका जाए।

वहीं, एनजीओ जस्टिस फॉर ऑल के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल व खगेश झा और  शिक्षा निदेशालय के अधिवक्ता ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि स्कूलों ने सस्ती दरों पर भूमि ली है और उन्हें तय कानून का पालन करना ही होगा।

खंडपीठ ने 19 जनवरी को दिए आदेश में कहा था कि ीस्कूल मुनाफाखोरी व स्कूली शिक्षा के व्यवसायीकरण में लिप्त नहीं हो सकते। अदालत ने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि मान्यता प्राप्त गैर सहायता प्राप्त स्कूल, दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम के तहत ही फीस ले सकते है।

यदि कोई स्कूल मुनाफाखोरी व बिना मंजूरी के फीस बढ़ोतरी में लिप्त पाया जाता है तो शिक्षा निदेशालय को हस्तक्षेप का पूरा अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि जहां तक गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को डीडीए से सस्ती दरों पर भूमि लेने का सवाल है, सभी स्कूल सर्वोच्च न्यायालय मॉडर्न स्कूल मामले में दिए गए फैसले को मानने के लिए बाध्य है। 

अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारा मन स्पष्ट है कि इस फैसले के तहत कोई भी स्कूल बिना शिक्षा निदेशालय की मंजूरी के फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकता।

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