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एमफिल-पीएचडी दाखिले में यूजीसी के नियमों को चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 19 Apr 2017 10:02 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट ने स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एसएफआई व तीन अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देश में एमफिल और पीएचडी पाठयक्रमों में दाखिले की योग्यता और तरीके पर यूजीसी के नियमों को चुनौती दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को 28 अप्रैल तक इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
याचिका में तर्क रखा गया है कि नए नियमों के चलते 2017-18 शैक्षणिक सत्र के लिए एमफिल और पीचडी की सीटों में भारी कटौती हुई है। पिछले सत्र में इन दोनों डिग्रियों के लिए 970 सीटों की तुलना में इस साल सीटें घटकर 102 हो गई हैं। यह यूजीसी का मनमाना व गैरकानूनी फैसला है। यह छात्रों के अधिकारों के खिलाफ है।
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ऐसे में यूजीसी द्वारा इस संबंध में गत वर्ष जारी अधिसूचना को रद्द किया जाए। गौरतलब है कि इससे पूर्व हाईकोर्ट के सिंगल जज ने इस मुद्दे पर दायर याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले को कुछ छात्रों ने दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे रखी है, जिस पर सुनवाई अभी लंबित है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को 28 अप्रैल तक इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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याचिका में तर्क रखा गया है कि नए नियमों के चलते 2017-18 शैक्षणिक सत्र के लिए एमफिल और पीचडी की सीटों में भारी कटौती हुई है। पिछले सत्र में इन दोनों डिग्रियों के लिए 970 सीटों की तुलना में इस साल सीटें घटकर 102 हो गई हैं। यह यूजीसी का मनमाना व गैरकानूनी फैसला है। यह छात्रों के अधिकारों के खिलाफ है।
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ऐसे में यूजीसी द्वारा इस संबंध में गत वर्ष जारी अधिसूचना को रद्द किया जाए। गौरतलब है कि इससे पूर्व हाईकोर्ट के सिंगल जज ने इस मुद्दे पर दायर याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले को कुछ छात्रों ने दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे रखी है, जिस पर सुनवाई अभी लंबित है।