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नर्सरी दाखिला : ‘नेबरहुड नीति लागू होने पर धर्म निरपेक्षता से दूर हो जाएंगे बच्चे’

Wed, 15 Feb 2017 11:44 AM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Feb 2017 11:44 AM IST
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Nursery admissions: 'Neighbourhood Policy will be applicable from the secular kids'
file photo - फोटो : अमर उजाला

नई दिल्ली । नर्सरी दाखिलों में नेबरहुड नीति को लागू किया गया तो बच्चों को धर्म निरपेक्षता से दूर किया जाएगा। अदालत ने कहा नेबरहुड नीति लागू करने से सभी धर्म व समुदायों के बच्चे एक साथ नहीं पढ़ पाएंगे। ऐसे में विविधता, खुलेपन, उदारता, समझ व संस्कृति का अभाव होगा ।

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हाईकोर्ट ने नर्सरी दाखिला मामले में उक्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नेबरहुड नीति का दुरुपयोग होगा और उसे रोकने का कोई तंत्र नहीं है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने  फैसले में कहा प्रथम दृष्टया उनका मानना है कि स्कूलों में सभी धर्मों व समुदाय के बच्चों के एक साथ पढ़ने से उनमें विविधता, खुलापन, उदारवाद, समझ व संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
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यदि नेबरहुड नीति से दाखिले हुए तो इन सबका अभाव हो जाएगा। अदालत का मानना है कि दूरी तय होने से उस इलाके में रहने वाले धर्म व समुदाय विशेष के ही बच्चों को दाखिला मिलेगा। 

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​नीति का होगा दुरुपयोग, रोकने का कोई तंत्र नहीं

Nursery admissions: 'Neighbourhood Policy will be applicable from the secular kids'
नर्सरी दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु

अदालत ने कहा, प्रथम दृष्टया यह भी स्पष्ट है कि स्कूलों में तत्काल दाखिलों का नतीजा छात्रों का विकास नहीं होगा और उनका विजन सीमित हो जाएगा। अदालत ने कहा नेबरहुड नीति सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक स्थिति देखे बिना उचित नहीं है। इस नीति से बिना प्रतियोगिता के समृद्ध व्यक्तियों को अच्छे स्कूल का लाभ मिलेगा। 

अदालत ने कहा अमीर माता-पिता जो बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला चाहते हैं, वे सर्वाधिक दुरुपयोग करेंगे। वे अपने रिस्तेदार-दोस्तों के घर में किराएदार रसीद या अन्य दस्तावेजों के जरिये दाखिला लेंगे।

यह लोग वहां रहते हैं या नहीं इस पर निगरानी व अंकुश लगाने के लिए कोई तंत्र नहीं है। इतना ही नहीं, इस नीति से कुछ बच्चों को जो इलाके में रहते हैं, उन्हें लाभ मिलेगा। यानी यह नीति भेदभाव करती है।

अदालत ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि कुछ अभिभावक अपने हित में नीति का विरोध कर रहे हैं, जबकि अधिकांश नीति के हक में हैं। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है। इस नीति से कुछ ही बच्चों व उनके अभिभावकों को लाभ होगा। जबकि, प्रतियोगिता खत्म होने से नुकसान होगा। 

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