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नर्सरी दाखिला : दूरी मापने का फॉर्मूला तय नहीं, दुविधा में अभिभावक
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Jan 2017 02:17 AM IST
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file photo
- फोटो : अमर उजाला
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स्कूल से नजदीक रहने वाले लोगों के बच्चों को पहले दाखिला मिले इसे लेकर सरकार ने जरूर अच्छी पहल की है, मगर दूरी मापने का फॉर्मूला तय नहीं होने से अभिभावक दुविधा में हैं। अभिभावक ये नहीं समझ पा रहे हैं कि दूरी बस रूट के लिहाज से मापी जाएगी या एरियल डिस्टेंस से। दूरी स्कूल के मुख्य ब्रांच से होगी या फीडर ब्रांच से। ये सवाल अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि इस संबंध में कोई फॉर्मूला तय किया जाए।
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दरअसल, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने शनिवार को सरकारी जमीन पर बने 298 स्कूलों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। उसके मुताबिक, 0-1 किलोमीटर, फिर 1-3 किलोमीटर, 3-6 किलोमीटर वाले आवेदकों को वरीयता दी जाएगी। मगर दूरी कैसे मापी जाएगी, यह नहीं बताया गया है। कुछ स्कूल बस रूट के लिहाज से दूरी मापते हैं। इससे एरियल डिस्टेंस में एक किलोमीटर में आने वाले लोग बस रूट के लिहाज से एक किलोमीटर के दायरे से बाहर चले जाते हैं।
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नर्सरी एडमिशन डॉट काम के प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि यह सवाल भी आ रहा है कि कई स्कूलों के फीडर ब्रांच हैं। जैसे गोल मार्केट में सेंट थॉमस स्कूल है, जिसकी कक्षा एक से ऊपर की क्लास गोल मार्केट में चलती है। यहीं स्कूल का मुख्य ब्रांच भी है। मगर इसका जूनियर विंग (फीडर ब्रांच) यानी नर्सरी और उसके नीचे की कक्षाएं करोल बाग में चलती हैं। ऐसे में अभिभावक दुविधा में हैं कि स्कूल मुख्य ब्रांच से दूरी मापेगा या फीडर ब्रांच से।
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सुमित का कहना है कि इस असमंजस को लेकर शिक्षा निदेशालय को कोई कदम उठाना चाहिए। निदेशालय 2014 में प्रयोग किए गए उस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकता है, जो दूरी मापने के लिए प्रयोग किया गया था। स्कूलों को वह सॉफ्टवेयर दिया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शी तरीके से दाखिला हो सके।