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नर्सरी दाखिला : फिलहाल 298 स्कूलों को अपनी नीति से दाखिलों की छूट

Sun, 19 Feb 2017 09:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Sun, 19 Feb 2017 09:22 AM IST
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Nursery admissions: Currently 298 schools admissions policy of the exemption
nursery admission - फोटो : अमर उजाला
नर्सरी दाखिलों में नेबरहुड नीति मामले में दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ से भी राहत नहीं मिली। अदालत ने सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले 298 स्कूलों को अपनी नीति से ही फिलहाल दाखिल प्रक्रिया जारी रखने की छूट प्रदान कर दी।
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अदालत ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि दाखिला प्रक्रिया उनके अंतिम निर्णय पर निर्भर होगी। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के उस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि सिंगल जज द्वारा नेबरहुड नीति पर लगाई गई रोक संबंधी फैसले पर रोक लगाई जाए।
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खंडपीठ ने कहा पेश तथ्यों से स्पष्ट है कि दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उस पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। खंडपीठ ने कहा वे दोनों पक्षों को स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि दाखिला मुद्दे पर उनके द्वारा दिया गया निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।
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अदालत ने कहा वे पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद कोई निर्णय देंगे। अदालत ने सरकार को सभी पक्षों को याचिका की प्रति प्रदान करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 22 फरवरी तय कर दी।

सिंगल जज का फैसला पूरी तरह से गलत

Nursery admissions: Currently 298 schools admissions policy of the exemption
file photo - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने तर्क रखा है कि सिंगल जज का फैसला पूरी तरह से गलत, दोषपूर्ण व कानून के खिलाफ है।

ऐसे में इसे खारिज किया जाना जरूरी है। सरकार ने कहा जिस प्रकार से स्कूलों को उनके द्वारा तय दिशा-निर्देशों पर बच्चों को दाखिला देने की छूट दी गई है उससे वे अपनी मनमर्जी करेंगे। इसके अलावा सिंगल जज ने जो तर्क दिए हैं वे आधारहीन और तय तथ्यों के विपरीत हैं।

उन्होंने कहा यदि नेबरहुड नीति के बिना स्कूलों को दाखिला जारी रखने की इजाजत दी गई तो वे मनमानी करेंगे और अभिभावकों से फीस के नाम पर वसूली करेंगे।

उन्होंने कहा संबंधित जज यह समझने में पूरी तरह से असफल रहे हैं कि नेबरहुड नीति बच्चों के हित में है और इससे उनका विकास होगा। नेबरहुड नीति से स्कूलों की मनमर्जी पर अंकुश लगेगा और वे भूमि लेने की शर्तों के तहत सरकार की नीतियों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। निजी स्कूलों ने भी तर्क रखा था कि मात्र 298 स्कूलों में नीति लागू करने से कुछ नहीं होगा जबकि 1400 स्कूलों को इस नीति से अलग रखा गया है।

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