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नर्सरी दाखिला : नहीं थम रही निजी स्कूलों की मनमानी, अब फीस रिफंड पॉलिसी बनी परेशानी का सबब

Sun, 18 Feb 2018 10:34 AM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Feb 2018 10:34 AM IST
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nursery admission: private schools are doing everything for their self will
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नर्सरी में दाखिले को लेकर अभिभावकों की परेशानी कम नहीं हो रही है। पहले ड्रा, फिर सूची और अब फीस रिफंड पॉलिसी ने उन्हें आफत में डाल दिया है। दरअसल, सूची जारी होते ही फीस को लेकर स्कूूलों की मनमानी शुरू हो चुकी है।

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कुछ स्कूल कह रहे है फीस रिफंड नहीं होगी तो कोई कह रहा है कि इसको लेकर पॉलिसी ही नहीं है। ऐसे में अभिभावक मनमानी झेलने को मजबूर हैं।

वो सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सरकार हर साल  नोटिफिकेशन जारी नहीं करती। जब तक कोई नया नोटिफिकेशन नहीं आता तब तक पुराना ही मान्य होता है। 

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ऐसे समझे नियम 

यदि किसी स्कूल में दाखिला कराने के एक माह के भीतर अभिभावक अन्य जगह के लिए पहली वाली सीट छोड़ते हैं तो एडमिशन, रजिस्ट्रेशन व एक माह की ट्यूशन फीस काट कर स्कूलों को बाकी राशि वापस करनी होगी।

वहीं, अगर एक माह बाद अभिभावक ऐसा करते हैं तो स्कूल फीस वापस करने को बाध्य नहीं होंगे। अभिभावकों का कहना है कि सरकार पुरानी फीस रिफंड पॉलिसी का ही नोटिफिकेशन जारी कर दे ताकि स्कूलों की मनमानी न झेलनी पड़े।

बड़ी राशि जमा करवा रहे, फीस का पता नहीं

स्कूलों में दाखिले शुरू हो गए हैं। लेकिन फीस किस मद में ली जाएगी यह तय नहीं है। स्कूल अभिभावकों से तय राशि जमा करवा रहे हैं। एक स्कूल ने 58 हजार रुपये जमा करवा लिए।

वहीं, कुछ ने 52 हजार, किसी ने 45 हजार । पूछने पर बताया जा रहा कि फीस तय नहीं है। परेशानी यह कि दाखिले के बाद अगर स्कूलों ने अत्यधिक फीस की डिमांड कर दी तो अभिभावक क्या करेंगे।

हर स्कूल अलग अलग राशि जमा करवा रहे हैं। इतना ही नहीं कई स्कूल ड्राफ्ट की जगह नगद राशि देने का दबाव बना रहे हैं। 

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ओरिएंटेशन के नाम पर 58 हजार की मांग

सूची जारी होने के बाद स्कूलों की नई नई मनमानी सामने आ रही है। साकेत स्कूल स्थित एपीजे स्कूल ओरिएंटेशन के नाम पर 58 हजार रुपये की मांग कर रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल फीस ले रहा है तो सिर्फ मेलजोल और जानकारी के लिए रुपये की मांग क्यों कर रहा है। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा का कहना है कि स्कूलों ने इस तरह का धंधा बना लिया है।

उन्हें सरकार का कोई डर नहीं है। जब सरकार ने फीस बढ़ोतरी पर लगाम रलगा रखा है, तो इस पर भी रोक लगाए। ताकि, अभिभावकों को इन सब से राहत मिल सके। 

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