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नर्सरी दाखिला : अल्पसंख्यक स्कूलों के लिए तय दिशा निर्देश पर दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट की फटकार

Fri, 20 Jan 2017 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Jan 2017 10:45 AM IST
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nursery admission: high court slams delhi government over rule making of minority schools
नर्सरी दाख‌िले पर कोर्ट की द‌िल्ली सरकार को फटकार - फोटो : अमर उलाजा/इंड‌ियन एक्सप्रेस

हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर देशभर की नर्सरी दाखिला नीति पेश करने का निर्देश दिया है।

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यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या भूमि आवंटन नीति में उन्हें नेबरहुड नीति की जानकारी है या नहीं। अदालत ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए अल्पसंख्यक स्कूलों को राहत प्रदान करने की ओर इशारा कर दिया।
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न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की ओर से पेश अधिवक्ता ने नेबरहुड नीति को गलत बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वसंत विहार इलाके में ज्यादातर बड़े स्कूलों की शाखा है।
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आखिर नेबरहुड नीति के तहत कितने बच्चों को दाखिला मिलेगा। उन्होंने कहा कि हर बच्चे, अभिभावक को तय करने का अधिकार है कि वह किस स्कूल में पढ़े। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनसंख्या को देखते हुए भी यह नीति नहीं चल सकती। यह नीति उनके मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन हो सकती है।

दो वर्ष पहले भी उपराज्यपाल ने इसी प्रकार से अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया

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nursery admission - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले भी उपराज्यपाल ने इसी प्रकार से अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया था लेकिन अदालत ने उसे गलत ठहराया था। इसके अलावा डीडीए व एल एंड डीओ ने भूमि का आवंटन मात्र आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षा की शर्त पर किया था। अब नेवरहुड की शर्त गलत तरीके से लगा दी गई है।

अदालत ने गृह मंत्रालय व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या डीडीए को दाखिलों में नेबरहुड नीति की उन्हें जानकारी भी है या नहीं।

क्या उनके पास इस प्रकार की कोई नीति है। इतना ही नहीं अदालत ने एचआरडी मंत्रालय को देशभर में नर्सरी दाखिलों के लिए तय नीति पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।

इससे पूर्व दो सदस्यीय खंडपीठ ने नर्सरी दाखिला मामले में सुनवाई से इनकार करते हुए कहा इस याचिका पर सिंगल जज ही सुनवाई करेंगे। निजी स्कूलों व अभिभावकों ने सरकार की नेवरहुड नीति को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि सरकार को इस प्रकार की नीति बनाने का कोई अधिकार नहीं है।

बिना एक्ट देखे कैसे जारी की अधिसूचना

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nursery admission - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने नर्सरी दाखिलों में दिल्ली सरकार द्वारा अल्पसंख्यक स्कूलों के लिए तय दिशा निर्देश पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आपने आखिर अंतिम समय, वह भी बिना एक्ट का अध्ययन किए कैसे अधिसूचना जारी कर दी। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या आपका इरादा लोगों को अदालत में आने से रोकना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के निर्णय पर रोक लगाने के पक्ष में है।

न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष अल्पसंख्यक स्कूलों की याचिका पर सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने जारी दिशा निर्देश को उचित ठहराने का प्रयास किया।

अदालत ने उनके तर्कों पर असहमति जताते हुए कहा आपने क्या वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए फैसले का अध्ययन किया है। अदालत ने साफ कहा था कि बिना एक्ट में संशोधन किए आप निर्णय अल्पसंख्यक स्कूलों पर नहीं लाद सकते।

उन्होंने कहा कि आपने बिना कोई संशोधन किए कैसे अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी अन्य स्कूलों के समान दिशा निर्देश तय कर अधिसूचना तय कर दी। यह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ है।

'आपने दाखिलों की प्रक्रिया शुरू होने के अंतिम समय में अधिसूचना जारी क्यों की'

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नर्सरी दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु - फोटो : गेटी ‌इमेज

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आपने आखिर दाखिलों की प्रक्रिया शुरू होने के अंतिम समय में अधिसूचना जारी क्यों की। आपको लगता है कि आपकी मनमर्जी चलेगी और कोई तय दिशा निर्देशों को चुनौती नहीं देगा। अदालत ने कहा आप कितना भी कर लो जिसे परेशानी होगी वह चुनौती देगा ही। अब भी तो चुनौती दी ही गई है।

अदालत के रवैये को देख उपराज्यपाल के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। अदालत ने कहा आप समय कितना ही ले ले लेकिन आप मेरा मन नहीं बदल सकते। उनका मानना है कि अधिसूचना पर रोक लगनी चाहिए। अदालत ने फिलहाल उन्हें शुक्रवार को अपना पक्ष रखने का निर्देश जारी कर दिया।

मालूम हो कि सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले अल्पसंख्यक समरविले और माउंट कार्मेल स्कूल ने नर्सरी दाखिलों को लेकर तय नीति के खिलाफ याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने तर्क रखा था कि उन पर भूमि आवंटन शर्तें लागू नहीं होती है।

स्कूलों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट के पूर्व के दो फैसले का हवाला दिया गया। स्कूलों ने पारामती एजुकेशनल एवं कल्चरल बनाम भारत सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पांच जजों के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि फैसले के अनुसार उन पर भूमि आवंटन की शर्तें नहीं थोपी जा सकती है। उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि शिक्षा का अधिकार कानून अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं होता है।

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