फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Nursery admission: enrollment without paving the way for Neighbourhood Policy

नर्सरी दाखिला : बिना नेबरहुड नीति के दाखिलों का रास्ता साफ

Mon, 27 Feb 2017 10:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Feb 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
Nursery admission: enrollment without paving the way for Neighbourhood Policy
नर्सरी दाख‌िला प्रक्र‌िया शुरु - फोटो : गेटी ‌इमेज

नर्सरी दाखिलों में नेबरहुड नीति से दाखिले नहीं होंगे। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को झटका देते हुए सिंगल जज के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें सरकार की नेबरहुड नीति को असंवैधानिक व मनमाना ठहराया था। गौरतलब है कि सिंगल जज ने नेबरहुड नीति को खारिज कर स्कूलों को अपनी नीति के तहत दाखिला देने की छूट  दी थी।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार की अपील खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि वर्तमान में नर्सरी दाखिला प्रक्रिया शुरू है और उनकी नजर में उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नजर नहीं आता।
विज्ञापन


उन्होंने कहा संबंधित न्यायमूर्ति मनमोहन ने 14 फरवरी को इस मुद्दे पर अपना अंतरिम निर्णय दिया था। अदालत ने कहा सिंगल जज ने अपने फैसले में जो टिप्पणियां की है अंतिम फैसला उससे प्रभावित नहीं होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

निर्देशों पर बच्चों को दाखिला देने की छूट दी गई है

Nursery admission: enrollment without paving the way for Neighbourhood Policy
nursery admission - फोटो : अमर उजाला

खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने जो तर्क उठाए हैं उन पर अभी निर्णय होना है ऐसे में वे न्यायमूर्ति मनमोहन को पहले से दायर स्कूलों व अभिभावकों की याचिका पर जल्द फैसला करने का निर्देश देते हैं।

दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल संजय जैन ने तर्क रखा था कि सिंगल जज का फैसला पूरी तरह से गलत, दोषपूर्ण व कानून के खिलाफ है। ऐसे में इसे खारिज किया जाना जरूरी है।

सरकार ने कहा जिस प्रकार से स्कूलों को उनके द्वारा तय दिशा निर्देशों पर बच्चों को दाखिला देने की छूट दी गई है उससे वे अपनी मनमर्जी करेंगे। इसके अलावा सिंगल जज ने जो तर्क दिए हैं वे आधारहीन और तय तथ्यों के विपरीत हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed