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'सरकार की इजाजत बिना नहीं निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी की इजाजत'

Sat, 20 Aug 2016 12:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 20 Aug 2016 12:17 PM IST
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No permission for fee hike to private school without govt
कोर्ट

हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि सरकार की इजाजत के बिना सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले नीजि स्कूलों को फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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अदालत ने कड़ा रवैया अपनाते हुए स्कूल प्रबंधकों से कहा कि यदि आपको भूमि आवंटन की शर्तें मंजूर नहीं है तो जमीन वापस कर दीजिए, सरकार खुद स्कूल का संचालन कर लेगी।
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इतना ही नहीं अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि यदि 60 वर्ष से सरकारें  सो रही थी तो आपको मनमर्जी और तय शर्तो के उल्लंघन की इजाजत मिल गई। अदालत फीस बढ़ोतरी करने से पहले दिल्ली सरकार, शिक्षा निदेशालय की अनिवार्य रूप से मंजूरी लेने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। 
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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के समक्ष निजी स्कूलों की एसोसिएशन व याचिकाकर्ता एक्शन कमेटी के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि भूमि आवंटन पत्र में फीस बढ़ोतरी से पहले मंजूरी लेने की शर्त है लेकिन लीज डीड में इसका कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में यह शर्तें स्कूलों पर लागू नहीं होती है। 

'निजी स्कूलों को आवंटन शर्तों का उल्लंघन करने नहीं अधिकार'

No permission for fee hike to private school without govt
निजी स्कूलों की आई शामत - फोटो : concept photo

न्यायमूर्ति ने उनके तर्क पर नाराजगी जताते हुए किसी भी प्रकार की राहत प्रदान करने से इंकार करते हुए कहा कि यदि आपको शर्तो का पालन करने में परेशानी है और स्कूल जमीन वापस करने को तैयार हैं तो बता दे, सरकार से आपको कीमत दिला दी जाएगी। 

अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल भूमि आवंटन के कुछ शर्तों का पालन करना चाहते हैं और कुछ का नहीं, ऐसा नहीं चलेगा। अदालत ने याची के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पिछले 60 साल से उन्हें फीस बढ़ाने की छूट मिली हुई है और इस दौरान किसी भी सरकार ने इस तरह की कार्रवाई नहीं की। 

अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि यदि कोई सरकार पिछले 60 साल तक सोई रही, इसका मतलब यह नहीं है कि निजी स्कूलों को आवंटन शर्तों का उल्लंघन करने का अधिकार मिल गया है। 

अदालत के रवैये को देख दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने भी कह दिया कि यदि स्कूल जमीन वापस करेंगे तो सरकार खुद स्कूलों का संचलान करने के लिए तैयार है। 

जानिए क्या है पूरा मामला

No permission for fee hike to private school without govt
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि वे अगली सुनवाई पर इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार व शिक्षा निदेशालय से दिशा-निर्देश लेकर पक्ष रखेंगे। उधर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कमल गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की मौजूदा सरकार स्कूलों को निशाने पर लेकर परेशान कर रही है।

फीस बढ़ोतरी करना निजी स्कूलों को मौलिक अधिकार है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमें आपके अधिकार के साथ-साथ स्कूलों में पढने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के मौलिक अधिकार के बारे में भी सोचना है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान एक्शन कमेटी द्वारा याचिका दाखिल करने के अधिकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी स्कूल को समस्या है तो वह खुद आगे आए।

फिलहाल अदालत ने मामले में उपराज्यपाल, दिल्ली सरकार, शिक्षा निदेशालय व डीडीए को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 10 नवंबर तय कर दी।

क्या है मामला-
पेश मामले में एक्शन कमेटी ने दिल्ली सरकार द्वारा विगत 19 फरवरी, 16 अप्रैल, 15 व 20 जुलाई को जारी आदेश को रद करने की मांग की है। साथ ही इस याचिका का निपटारा होने तक इन आदेशों पर रोक लगाने की मांग की है।

सरकार ने गैर सरकारी सगंठन जस्टिस फॉर ऑल की याचिका पर इसी साल 19 जनवरी को हाईकोर्ट के दो जजों के फैसले को लागू करने के लिए यह आदेश जारी किए हैं। 

हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी से पहले सरकार की मंजूरी लेने को अनिवार्य कर दिया था। याचिका में स्कूलों के खातों की जांच के लिए गठित जस्टिस अनिल देव सिंह कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देकर 10 फीसदी शुल्क बढ़ाने की अनुमति मांगी गई है।
 
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