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एमडीयू में कंपार्टमेंट वालों की NO ENTRY

ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Mon, 05 Jun 2017 09:20 AM IST
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अगर 12वीं कक्षा में किसी विद्यार्थी का कंपार्टमेंट है तो उसे महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) से संबद्ध कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलेगा। एमडीयू ने कंपार्टमेंट वाले छात्रों के आवेदन लेने से मना कर दिया है। उच्चतर शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जबकि ऑनलाइन आवेदन में शामिल दो और यूनिवर्सिटी में मौका दिया जा रहा है। यह कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी है। 
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प्रदेश के राजकीय कॉलेजों में दाखिला के लिए आवेदन प्रक्रिया 08 जून से शुरू हो रही है। एमडीयू के आदेश के बाद उच्चतर शिक्षा विभाग ने भी अपनी वेबसाइट पर इसे डिस्प्ले कर दिया है। विभाग की ओर से भी ऑनलाइन आवेदन में कंपार्टमेंट की सूरत में फॉर्म स्वीकृत नहीं किए जाएंगे। ऐसे में शहर के तीनों कॉलेजों से सैंकड़ों छात्रों को मायूस होना पड़ेगा। एमडीयू में दाखिला लेने वाले छात्रों को एडमिशन के समय 12वीं कक्षा का फाइनल रिजल्ट दिखाना होगा। अगर स्टूडेंट की कंपार्टमेंट है तो उसे एडमिशन नहीं मिल पाएगा। 


यूनिवर्सिटी प्रबंधक का मानना है कि कंपार्टमेंट वाले छात्रों का रिजल्ट जुलाई के बाद आता है। ऐसे में उन छात्रों को यदि अवेटेड रिजल्ट कर आवेदन करा दिया जाता है तो मेरिट तैयार करने में दिक्कत आएगी। दाखिला मेरिट के आधार पर होने के कारण उन्हें होल्ड नहीं कराया जा सकता है। यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का कहना है कि कई कोर्स में सीटें तीसरी मेरिट के बाद भी खाली रहती है। 

यूनिवर्सिटी नए सिरे से आवेदन के लिए कहती है तो ऐसे में कंपार्टमेंट वाले छात्रों को फाइनल रिजल्ट आने के बाद ही एडमिशन के बारे में सोचा जा सकता है। फिलहाल दरवाजे बंद है। वहीं, उच्चतर शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरुण जोशी का कहना है कि कंपार्टमेंट वाले छात्र को दाखिला देना है या नहीं देना है? यह यूनिवर्सिटी का फैसला है। 

बोर्ड के 48.88 फीसदी छात्र रहे हैं री-अपीयर
प्रदेश के हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के रिजल्ट में करीब 40 फीसदी विद्यार्थी फेल हुए है। अकेले गुरुग्राम में 23.42 फीसदी कंपार्टमेंट के विद्यार्थी है। 23.52 फीसदी विद्यार्थी फेल है। महज 52.02 फीसदी ही विद्यार्थी गुरुग्राम में सफल रहे हैं। फरीदबाद, पलवल, मेवात समेत प्रदेश के दूसरे जिले का हाल है। इसी तरह सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के करीब तीन फीसदी छात्रों के री-अपीयर है। 

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