मिशन एडमिशन : बीएड कॉलेजों पर शिकंजा, देना होगा हलफनामा
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कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले जिस तरह छात्रों को हलफनामा देना पड़ता था। अब चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएसयू) ने भी कॉलेजों से हलफनामा देने के लिए कहा है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
सीसीएसयू की ओर से सभी बीएड कॉलेजों को 25 जून से पहले शपथ पत्र भेजने के निर्देश देते हुए कहा कि दाखिलों से पहले संस्थान मानकों को पूरा कर लें। यूनिवर्सिटी की ओर से सोमवार से बीएड कोर्स के लिए काउंसलिंग शुरू की जा रही है।
अभी तक दाखिल के दौरान छात्र-छात्राओं को शपथ पत्र देना होता था, मगर अब यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों से भी शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से सभी बीएड कॉलेजों को पत्र भेजकर 25 जून तक शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा शिक्षक, लैब, क्लासरूम और कोर्स समेत जो भी मानक हैं, उनको पूरा कर लिया जाए। अगर किसी छात्र-छात्रा की ओर से शिकायत आई तो उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
यूनिवर्सिटी की ओर कहा गया है कि कुछ कॉलेज बिना किसी सुविधाओं के ही छात्रों के दाखिले ले लेते हैं और बाद में छात्रों को न तो पढ़ाया जाता है और न ही शिक्षक पूरे हो पाते हैं।
इसलिए यूनिवर्सिटी ने पहले ही कॉलेजों को मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। यूनिवर्सिटी अधिनियम 1973 के अनुसार सभी कॉलेज जो यूजीसी द्वारा घोषित मानको को पूरा करें।
अगर ऐसा नहीं होता है तो उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय की अध्यादेश के तहत जांच भी कराई जा सकती है। अधिनियम के तहत जो भी मानक होते हैं, उनको पूरा होने के बाद ही छात्रों को दाखिला दिया जाना चाहिए।
अध्यक्ष सचिव ही दे सकेंगे शपथ पत्र
कॉलेज के अध्यक्ष और सचिव की ओर से ही शपथ पत्र को यूनिवर्सिटी मानेगी। यदि किसी अन्य पदभार द्वारा इस तरह का शपथ पत्र दिया जाएगा तो यूनिवर्सिटी उसे मान्य नहीं करेगी। इसलिए कॉलेज के अध्यक्ष और सचिव को ही इस शपथ पत्र को अधिकार है चूंकि संस्थान ने उनको अधिकार प्रदत्त किए हैं।
बिना सत्यापन काउंसलिंग में नहीं कर पाएंगे भागीदारी
एमएड कॉलेजों को यूनिवर्सिटी ने अब अंतिम मौका दिया है कि वह अपने कॉलेजों के शिक्षकों का सत्यापन करा लें। उसके लिए 15 जून को बुलाया गया है। दरअसल, यूनिवर्सिटी क्षेत्र में 21 शिक्षण संस्थानों में एमएड पढ़ाया जा रहा है।
पिछले दिनों एकेटीयू की ओर से शिक्षकों की जांच की गई थी। इसमें 20 हजार से अधिक शिक्षक फर्जी निकले थे। उसी आधार पर सीसीएस यूनिवर्सिटी भी एमएड कॉलेजों में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति से बचना चाह रही है। अगर फिर भी कॉलेजों ने सत्यापन नहीं कराया तो उनको दाखिले नहीं लेने दिए जाएंगे।