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कश्मीरी विस्थापित छात्रों के इंतजार में कॉलेज, पहली बार मिल रहा मौका

Wed, 03 Aug 2016 01:03 AM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 03 Aug 2016 01:03 AM IST
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Kashmiri displaced college students waiting, getting the first chance
दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली विश्वविद्यालय में कट ऑफ के आधार पर दाखिला प्रक्रिया पूरी हो चुकी और मेरिट से दाखिले की प्रक्रिया जारी है। बावजूद कॉलेज कश्मीरी विस्थापित छात्रों के इंतजार में हैं। 

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इस श्रेणी के लिए पहली बार अलग से कट ऑफ निकाली गई थी लेकिन तब भी कॉलेजों में इक्का-दुक्का ही दाखिले हुए हैं। इस श्रेणी के दाखिले नहीं होने के कारण कॉलेज परेशान हैं। 
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बीते साल तक इस श्रेणी के छात्रों को कॉलेज आवंटित किए जाते थे। इस प्रक्रिया के तहत लगभग दो सौ दाखिले होते थे। आर्यभट्ट कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोज सिन्हा ने बताया कि कश्मीरी विस्थापित श्रेणी के तहत अब तक तीन-चार दाखिले ही हुए हैं। 
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जबकि इस श्रेणी के लिए इस बार सुपरन्यूमरी कोटा (कुल सीटों से अतिरिक्त) रखा गया था। इतना ही नहीं बीते साल तक दिल्ली, जम्मू-कश्मीर वाले कश्मीरी विस्थापितों को ही इस श्रेणी में दाखिले का लाभ मिल पाता था लेकिन इस बार यह ऑल इंडिया स्तर पर खोला गया। 

बावजूद उम्मीदवार नहीं आ रहे हैं। वह कहते हैं कि अगर छात्र दाखिला ले भी रहे होंगे तो टॉप कॉलेजों में ही ले रहे होंगे। रामजस कॉलेज के दाखिला कनवीनर सुरेश कुमार के मुताबिक कश्मीरी विस्थापित श्रेणी केतहत कम दाखिले हो रहे हैं। इनकी सीटें अभी खाली चल रही हैं। 


हालांकि रामजस कॉलेज के लिए राहत की बात यह हैकि उनकेयहां पर कश्मीरी विस्थापित श्रेणी के तहत एक ऐसे छात्र ने फिजिकल साइंस में दाखिला लिया है। 

इस छात्र को प्रधानमंत्री फेलोशिप मिली हुई है और इसके 95.75 फीसदी अंक है। लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ प्रत्युषा वात्सलय ने बताया कि उनके यहां भी इस श्रेणी के दाखिलों की रफ्तार काफी धीमी है। चूंकि अभी मेरिट का दूसरा चरण अगले सप्ताह से शुरु होना है तो संभवत: तब तक इस श्रेणी के दाखिले के लिए छात्र पहुंचे। 

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