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डीयू में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म का पाठ्यक्रम तैयार

Sat, 25 Mar 2017 12:01 AM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Mar 2017 12:01 AM IST
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journalism course ready for du
दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली विश्वविद्यालय में पहली बार शुरू होने जा रहे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले पांच वर्षीय इंटरग्रेडिट कोर्स का पाठ्यक्रम तैयार हो गया है। विदेशी विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म कोर्स को टक्कर देने के लिए पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया गया है। इसके तहत पांच वर्ष के इंटरग्रेटिड कोर्स में एक विदेशी व एक क्षेत्रीय भाषा पढ़ना अनिवार्य होगा। दाखिला प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा।

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कोर्स की खास बात यह है कि तीन वर्ष में यदि छात्र उसे छोड़ना चाहेगा, तो तीन वर्ष की स्नातक की डिग्री मिल जाएगी। इसे डीयू की एसी व ईसी की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। पांच वर्षीय इंटग्रेटिड कोर्स का पाठ्यक्रम तैयार करने वाली कमेटी की कन्वीनर डॉ. सविता दत्ता ने बताया कि आगामी सत्र से डीयू में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म की शुरुआत होने जा रही है। यह स्कूल डीयू के केशवपुरम स्थित सेंटर से चलाया जाएगा। कोर्स के लिए पाठ्यक्रम को डीयू के शिक्षकों ने ही तैयार किया है।
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 गौरतलब है कि 12वीं के बाद किसी भी स्ट्रीम आर्ट्स (ह्यूमेनिटीज), कॉमर्स व साइंस का छात्र इसमें दाखिला ले सकेगा। दाखिले के लिए 50 फीसदी वेटेज 12वीं के अंकों की होगी, जबकि 50 फीसदी एंट्रेस (प्रवेश परीक्षा) की होगी। फिलहाल यह तय नहीं किया गया है कि साक्षात्कार व समूह चर्चा को शामिल किया जाएगा या नहीं।
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पाठ्यक्रम में 50 फीसदी कार्य अनुभव व 50 फीसदी थ्योरी का पार्ट होगा। डॉ. दत्ता के अनुसार, पूरे पाठ्यक्रम में देशी इनपुट को तो शामिल किया ही गया है, विदेशी संस्थानों व विश्वविद्यालयों के जर्नलिज्म के पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

खोजी पत्रकारिता से एनिमेशन तक 
कोर्स में पत्रकारिता के इतिहास से लेकर खोजी पत्रकारिता, वेब पत्रकारिता, बिजनेस पत्रकारिता, एनिमेशन व सिनेमैटिक्स समेत कई अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है। डीयू की योजना स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के अंतर्गत कुछ एड ऑन कोर्स शुरू करने की भी है।  

 
फ्रैंच, तमिल व बांग्ला का विकल्प
पांच साल तक विदेशी व क्षेत्रीय भाषा पढ़ाना अनिवार्य होगा। विदेशी भाषा के अंतर्गत चार भाषाओं फ्रैंच, अरेबिक, स्पेनिश व चाइनीज का विकल्प दिया जाएगा। इनमें से किसी एक भाषा का चयन करना होगा। क्षेत्रीय भाषाओं में तमिल व बांग्ला में से किसी एक को चुनना होगा। डॉ. दत्ता ने बताया कि भाषा का अध्ययन छात्रों के लिए बाजार की जरूरत के अनुसार मददगार साबित होगा।

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