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JNUSU Election: देरी से शुरू हुए मतदान, NSUI ने प्रशासन पर लगाए एबीवीपी का साथ देने के आरोप

Fri, 06 Sep 2019 01:14 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 06 Sep 2019 01:14 PM IST
सार

  • 30 मिनट देरी से शुरू हुआ मतदान
  • एनएसयूआई ने जेएनयू प्रशासन पर एबीवीपी का साथ देने का आरोप लगाया
  • 12 बजे तक हुई 10-15 प्रतिशत वोटिंग
  • बुधवार रात प्रेजीडेंशियल डिबेट में अध्यक्ष पद के पांच उम्मीदवारों ने अपनी उपलब्धियां गिनवाते हुए मतदाताओं से वोट मांगे

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JNUSU election 2019 voting start 30 minute late nsui alleges administration all update
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के लिए हो रही वोटिंग - फोटो : अमर उजाला/एएनआई

विस्तार

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू)  में छात्रसंघ चुनाव में शुक्रवार को 30 मिनट देरी से मतदान शुरू हुआ। इस बीच कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने जेएनयू प्रशासन पर भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी का साथ देने का आरोप भी लगाया है।

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जानकारी के अनुसार दोपहर 12 बजे तक 10-15 प्रतिशत तक वोटिंग हो चुकी थी। इससे पहले बुधवार रात प्रेजीडेंशियल डिबेट में अध्यक्ष पद के पांच उम्मीदवारों ने अपनी उपलब्धियां गिनवाते हुए मतदाताओं से वोट मांगे।
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प्रेसिडेंशियल डिबेट में छाए रहे ये मुद्दे

झेलम लॉन में रात 10 बजे के बाद प्रेजीडेंशियल डिबेट शुरू हुई। इसमें एनआरसी, अफवाह पर भीड़ द्वारा मारपीट, कश्मीर में अनुच्छेद-370 को हटाना से लेकर अमेजन के जंगल में आग का मुद्दा छाया रहा। इस दौरान बापसा जय भीम, लेफ्ट यूनिटी ढपली की थाप पर लाल सलाम तो एबीवीपी ढोल, मंजीरा व चिमटे के साथ भारत माता की जय और वंदे मातरम का जयघोष करता रहा।
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पिछले साल की तरह इस बार भी प्रेजीडेंशियल डिबेट में दो छात्र संगठनों में झड़प हुई। लेफ्ट का आरोप है कि एबीवीपी ने मारपीट की। इस पर एबीवीपी का कहना है कि यह आइसा व एसएफआई की चाल है। मतदान शुक्रवार सुबह नौ से शाम पांच बजे तक होगा, जबकि देर शाम मतगणना शुरू हो जाएगी।

कैंपस केंद्रित राजनीति का मॉडल बनाएंगे : एबीवीपी

सबसे पहले एबीवीपी के अध्यक्ष पद प्रत्याशी मनीष जांगिड़ ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों के साथ डिबेट शुरू की। मनीष ने कहा कि टुकड़े-टुकड़े गिरोह नौ फरवरी को विश्वविद्यालय पर धब्बा लगाने के लिए जिम्मेदार हैं, जब देशद्रोह के नारे लगाए गए थे।

वहीं, जब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाया गया तो हम इस कदम का जश्न मना रहे थे, लेकिन वामपंथी सेना को गालियां दे रहे थे। उन्होंने कहा कि निर्वाचित होने पर एबीवीपी कैंपस केंद्रित राजनीति का मॉडल पेश करेगी और वंचित वर्ग की महिलाओं का प्रवेश सुनिश्चित करेगी। जांगिड़ ने छात्रावास की स्थितियों और कक्षाओं में सुविधाओं के अभाव का भी मुद्दा उठाया।

दो करोड़ नौकरियों का वादा कहां गया : एनएसयूआई

एनएसयूआई के उम्मीदवार प्रशांत कुमार ने देशद्रोह विवाद का जिक्र करने के लिए जांगिड़ की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। इस पर उन्हें कई वाम और बापसा (बीएपीएसए) समर्थकों से तालियां मिलीं। उन्होंने कहा, ‘हमसे दो करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन नौकरियां कहां हैं? नजीब के साथ जो हुआ मैं उसकी निंदा करता हूं।’ जेएनयू छात्र नजीब कैंपस से लापता हो गया था और अभी तक उसका कोई पता नहीं चला है।

कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन : लेफ्ट यूनिटी

लेफ्ट यूनिटी (आइसा, एसएफआई, एआईएसएफ, डीएसएफ) से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आईसी घोष ने पत्रकार गौरी लंकेश और विद्वान कलबुर्गी के विचारों से समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि वे अखलाक, जुनैद और पहलू खान को नहीं भूलेंगे, जिनकी अलग-अलग घटनाओं में भीड़ ने कथित तौर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पूंजीवादी बल पूरे विश्व में दक्षिणपंथियों के उद्भव को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ‘हम धन-बल के आधार पर लड़े गए और जीते गए चुनावों को चुनाव नहीं मानते हैं। इसके अलावा आरटीआई कानून और ट्रांसजेंडर अधिकार विधेयक को कमजोर करने का सरकार पर आरोप लगाया और कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।

कश्मीरियों और असमियों को सलाम : बापसा

बिरसा आंबेडकर फूले छात्र संगठन (बापसा) उम्मीदवार जितेंद्र सुना ने ‘जीतेगा जितेंद्र’ के नारों के बीच मंच संभाला। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे कश्मीरियों को सलाम करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की और साथ ही असमियों को भी सलाम किया, जो अपनी नागरिकता के लिए लड़ रहे हैं। सुना ने कहा कि वह मजदूर थे और उनकी प्रेसिडेंशियल डिबेट में उनकी जिंदगी का संघर्ष दिखता है। दक्षिणपंथियों और वामपंथियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा डर का माहौल बना रही है।

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