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जेएनयू में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते-करते, तीन बच्चों के पिता बन गए यहां के स्टूडेंट

Wed, 17 Jul 2019 03:07 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 17 Jul 2019 03:07 PM IST
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JNU security guard becomes student
जेएनयू (फाइल फोटो)

राजस्थान के रामजल मीणा उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो परेशानियों और घर के हालातों के आगे बेबस होकर पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले मीणा इसी कॉलेज के छात्र बन गए। पढ़ाई की ललक ऐसी लगी कि यहां काम करते हुए उन्होंने बीए-रशियन लैंग्वेज की प्रवेश परीक्षा पास कर ली। उनकी इस सफलता पर हर कोई फख्र कर रहा है।

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रामजल मीणा ने वर्ष 2014 में जेएनयू में सिक्योरिटी गार्ड का जिम्मा संभाला। घर की आर्थिक स्थिति और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने जैसे-तैसे स्कूल में पढ़ाई की।
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जेएनयू का माहौल भाने के बाद उन्होंने यहां पढ़ाई करने की ठानी। उन्होंने इस साल बीए-रशियन लैंग्वेज का एंट्रेंस एग्जाम पास किया। अब उनका सपना यहां से पढ़कर सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने का है।

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तीन बच्चों के पिता ने मारी बाजी

राजस्थान के छोटे से गांव भजेड़ा निवासी रामजल ने राजस्थान से ही ओपन एजुकेशन से हिंदी-साहित्य, राजनीति शास्त्र व इतिहास विषयों के साथ स्नातक की। वह साइंस के छात्र भी रहे और बीएससी प्रथम वर्ष की भी पढ़ाई की, लेकिन फिर शादी हो गई। इसके बाद पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो गई।

तीन बच्चों के पिता अपनी संतान के हीरो बन गए हैं। बहनों की शादी के लिए उन्होंने मजदूरी तक की है। पिता चाहते थे कि वह कुछ पढ़ाई करें। जयपुर बीए का फॉर्म भरने आने पर यहां सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती का पता चला। भर्ती होने के बाद प्रशिक्षण के लिए उन्हें गुरुग्राम भेजा गया। सबसे पहले दिल्ली मेट्रो में सिक्योरिटी गार्ड रहे। साल 2014 में जेएनयू आए।

मन में ठाना और कर दिखाया
रामजल कहते हैं कि गार्ड की नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन मन में ठाना हुआ था। इसलिए उन्होंने साबित कर दिया कि पढ़ाई कभी भी और किसी भी उम्र में की जा सकती है। ड्यूटी के दौरान पढ़ाई करने के कारण डांट भी खाई। कुछ प्रोफेसर और विद्यार्थियों से उन्हें हमेशा सहयोग मिलता रहा। रशिया के विषय में समाचार पत्रों में पढ़ने पर उसके विषय में जानने की इच्छा हुई। वहां का साहित्य अच्छा लगा तो उस विषय को चुन लिया।

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