फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   JNU professor Ashok Kadam filed an FIR against 17 students in delhi

JNU प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच एक प्रोफेसर ने 17 छात्रों पर दर्ज करवाई FIR

Tue, 20 Mar 2018 03:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 20 Mar 2018 03:28 PM IST
विज्ञापन
JNU professor Ashok Kadam filed an FIR against 17 students in delhi
प्रदर्शन करते जेएनयू छात्र - फोटो : अमर उजाला
यौन उत्पीड़न के आरोपी जेएनयू प्रोफेसर को लेकर बवाल जारी है। अब JNU के एक प्रोफेसर ने 17 छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। उन्होंने छात्रों पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन


JNU के प्रोफेसर अशोक कदम ने 17 छात्रों के खिलाफ यह FIR दर्ज करवाई है। उन्होंने छात्रों पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
 


जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में यौन उत्पीड़न के आरोपी जेएनयू प्रो. अतुल जौहरी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर छात्रसंघ ने सोमवार को दिन भर हंगामा किया। छात्र-छात्राओं ने वसंत कुंज थाने के बाहर भी उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और छात्रों के बीच धक्कामुक्की और हाथापाई भी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस के बैरिकेड को गिरा दिया। छात्रों की मांग है कि सभी नौ शिकायतों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जाए। जब उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे धरने पर बैठ गए। जेएनयू कैंपस में दिनभर स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के छात्र विश्वविद्यालय प्रबंधन के समक्ष आरोपी प्रो. को सस्पेंड करने की मांग करते रहे। 

उधर पुलिस प्रशासन का कहना है कि पुलिस और छात्रों के बीच झड़प जरूर हुई, लेकिन हाथापाई नहीं हुई। आइसा की नेता शेहला राशिद ने कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। 

JNU professor Ashok Kadam filed an FIR against 17 students in delhi
प्रदर्शन करते जेएनयू छात्र - फोटो : अमर उजाला
यह मामला वामपंथी और दक्षिणपंथी नहीं, बल्कि सही और गलत का है। छात्र संघ की अध्यक्ष गीता कुमारी के मुताबिक, अतुल जौहरी पर नौ छात्राओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद जेएनयू प्रशासन ने प्रोफेसर को निलंबित नहीं किया है। 

विरोध के चलते क्लासरूम बंद 
जेएनयू में सोमवार को कक्षाएं ठप रहीं और छात्रों ने आधे दर्जन से अधिक अध्ययन केंद्रों पर ताले जड़ दिए। मामला जेएनयू प्रशासन द्वारा अलग-अलग केंद्रों से सात चेयरपर्सन और डीन को बदलने और लाइफ साइंस के प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों का है। छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर इस बंद का समर्थन किया। छात्रों ने कई केंद्रों के गेट पर ताला लगाकर उन्हें सील कर दिया। 

जेएनयू शिक्षक यूनियन ने शुरू किया सत्याग्रह 
शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों ने कैंपस में तीन दिन के सत्याग्रह के साथ भूख हड़ताल शुरू कर दी। छात्रों का आरोप है कि कुलपति ने  मनमानी से अपने खास लोगों को काबिज करने के लिए कई केंद्रों के सात चेयरपर्सन और डीन को बदल दिया। वे अनिवार्य उपस्थिति को लागू करने और अपने फैसलों को जबरदस्ती थोपने के लिए हर केंद्रों में प्रमुख पदों पर अपने लोगों को गलत तरीके से भरना चाहते हैं। 

JNU professor Ashok Kadam filed an FIR against 17 students in delhi
प्रदर्शन करते जेएनयू छात्र - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन पर जौहरी को बचाने का आरोप
 छात्र संघ की अध्यक्ष गीता कुमारी के मुताबिक, अतुल जौहरी पर नौ छात्राओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उनके खिलाफ एफआइआर भी दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद जेएनयू प्रशासन ने अतुल जौहरी को निलंबित नहीं किया है। इसके उलट कुलपति समेत कई प्रशासनिक अधिकारी उन्हें बचाने में लगे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ शिकायत करने वाली छात्राओं को प्रशासन ने एक कमरे में बंद कर दिया। जेएनयू की अन्य छात्राओं को उनसे मिलने भी नहीं दिया गया। जब वे पीड़ित छात्राओं से मिलने की कोशिश कर रही थीं तो जेएनयू प्रशासन के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि 72 घंटे से ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

अकादमिक माहौल बिगाड़ रहे कुछ शिक्षक : प्रशासन 
जेएनयू प्रशासन ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने वाले कुछ शिक्षकों पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगाया। रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार की ओर से जारी बयान के मुताबिक विश्वविद्यालय में कुछ शिक्षकों के समर्थन से कुछ छात्र अकादमिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

वहीं, जेएनयू के प्रोफेसर अतुल जौहरी ने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि अनिवार्य उपस्थिति के पक्ष में उन्होंने खुलकर बातचीत की है, इसलिए उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed