फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   JNU online submission of mphil phd thesis no delay in checking

जेएनयू : एमफिल-पीएचडी थीसिस जांच में नहीं होगी देरी

Mon, 15 Jun 2020 08:02 PM IST
पूजा त्रिपाठी सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 15 Jun 2020 08:02 PM IST
सार

- ऑनलाइन होगी जमा प्रक्रिया, गाइड तय समय में करेंगे जांच, वाइवा का समय निर्धारित 
- कॉपी या चोरी का झंझट खत्म, सत्यापित सर्टिफिकेट करना पड़ेगा अपलोड

विज्ञापन
JNU online submission of mphil phd thesis no delay in checking
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

अब एमफिल और पीएचडी थीसिस जमा करने और जांचने में सालों इंतजार नहीं करना होगा। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) शैक्षणिक सत्र 2020-21 से ऑनलाइन थीसिस जमा करवाने की योजना शुरू कर रहा है। इसमें रिसर्च स्कॉलर ऑनलाइन थीसिस अपने गाइड को भेजेगा। उन्हें तय समय में जांच का काम पूरा करना होगा। इसके लिए समयसीमा निर्धारित की है। 
विज्ञापन


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ऑनलाइन थीसिस जमा करने की योजना को जेएनयू लागू करने जा रहा है। थीसिस पूरी होने के साथ उसे विवि के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। पहले स्कॉलर और गाइड को थीसिस चोरी की तो नहीं है, यह भी जांचना होगा। इसका सत्यापित सर्टिफिकेट भी अपलोड किया जाएगा। 
विज्ञापन


एसएमएस से गाइड को देनी होगी जानकारी
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, छात्रों को ऑनलाइन थीसिस तैयार करने के बाद गाइड को भेजने के साथ एसएमएस भी करना होगा। मैसेज के 7 दिनों के भीतर शिक्षक को जांचना होगा। इसके बाद यदि कोई आपत्ति हो तो संबंधित स्कॉलर को बताया जाएगा। यदि कोई आपत्ति नहीं है तो इसके सात दिन के बाद अगले परीक्षक को जांचने के लिए भेजना होगा। थीसिस जांचने का काम छह हफ्तों में पूरा होगा। विभाग की सभी कार्रवाई पूरी होने के साथ एक महीने में वाइवा भी आयोजित करना अनिवार्य रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

2020 सत्र से थीसिस जमा करने व जांचने में अब देरी नहीं होगी। छात्र या स्कॉलर को ऑनलाइन अपनी थीसिस अपने गाइड को भेजनी पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी। वहीं, गाइड को भी तय समय में जांचने का काम करना होगा। अभी तक इस पूरे काम में देरी होती थी। इसके अलावा सबसे बड़ा फायदा होगा कि थीसिस चोरी का खतरा भी नहीं रहेगा। सभी थीसिस को ऑनलाइन पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा। - प्रो. एम जगदीश कुमार, कुलपति, जेएनयू

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed