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जेएनयू विवाद: कन्हैया कुमार सहित अन्य छात्रों के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई पर रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 20 Oct 2016 09:40 AM IST
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कन्हैया कुमार
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रसाशन को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराए गए छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य सहित अन्य छात्रों के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई न करने संबंधी अवधि सात नवंबर तक बढ़ा दी।
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न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह आदेश कन्हैया व अन्य की उस याचिका पर दिया है, जिसमें जेएनयू में 9 फरवरी के विवादास्पद मामले में अपील अथॉरिटी के निर्णय को चुनौती दी गई है।
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संबंधित अथॉरिटी ने जेएनयू प्रशासन के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 19 को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनके निलंबन की सजा को बहाल किया गया।
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कन्हैया, उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य की और से पेश अधिवक्ता ने अपीलीय अथॉरिटी के फैसले को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि अपीलीय अथॉरिटी द्वारा 22 अगस्त को दिया आदेश एक तरफ है।
उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुलपति की अपील अथॉरिटी ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था लेकिन जो मुद्दे उनके मुवक्किलों ने उठाए उन पर विचार ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय एक तरफ है।
जेएनयू प्रशासन ने मुवक्किलों को नहीं दिया मौका
9 फरवरी को जेएनयू परिसर में देश विरोधी नारेबाजी को लेकर इस छात्रों पर आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों को जांच के दौरान नोटिस तक नहीं दिया गया, इसके अलावा जेएनयू प्रशासन ने उनके मुवक्किलों को पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया।
उन्होंने कहा उनको यह तक नहीं बताया गया कि उनके खिलाफ जांच के लिए अनुशानात्मक कार्रवाई के कमेटी बनाई गई है। नोटिस जिस ई.मेल पर भेजा गया वह भी गलत था। जेएनयू प्रशासन की जांच व प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि अपराधिक मामला व अनुशानात्मक कार्रवाई अलग प्रक्रिया है और जेएनयू प्रशासन को अनुशासन बनाए रखने का अधिकार है। अदालत ने मामले की सुनवाई सात नवंबर तय करते हुए कहा कि अगले आदेश तक जेएनयू प्रशासन छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
उन्होंने कहा उनको यह तक नहीं बताया गया कि उनके खिलाफ जांच के लिए अनुशानात्मक कार्रवाई के कमेटी बनाई गई है। नोटिस जिस ई.मेल पर भेजा गया वह भी गलत था। जेएनयू प्रशासन की जांच व प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि अपराधिक मामला व अनुशानात्मक कार्रवाई अलग प्रक्रिया है और जेएनयू प्रशासन को अनुशासन बनाए रखने का अधिकार है। अदालत ने मामले की सुनवाई सात नवंबर तय करते हुए कहा कि अगले आदेश तक जेएनयू प्रशासन छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।