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जामिया के प्रोफेसर लंदन में करेंगे फेलोशिप, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी
Thu, 18 Jul 2019 09:05 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 18 Jul 2019 09:05 AM IST
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फाइल फोटो
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर इंटरडिस्पिलनरी रिसर्च इन बेसिक साइंस में सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद हसन लंदन की रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी (एफआरएसबी) के लिए चुने गए हैं।
बायोलॉजी के क्षेत्र में जिनका उल्लेखनीय योगदान होता है, उन्हें रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी अपने फेलो के तौर पर चुनती है। इसके तहत उन्हें एफआरएसबी की फेलोशिप मिलती है।
डॉ. हसन को यह सम्मान कैंसर ऑफ न्यूरोडिजनरेटि जैसी बीमारियों के थेरप्यूटिक मैनेजमेंट इस्तेमाल में हाई अफिनिटी सेलक्टिव काइनेस इन्हिबीटर की खोज करने के लिए दिया गया है।
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डॉ. हसन ने वर्ष 2007 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से पीएचडी डिग्री हासिल करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया ज्वाइन करके अपने रिसर्च को आगे बढ़ाया।
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बायोलॉजी के क्षेत्र में जिनका उल्लेखनीय योगदान होता है, उन्हें रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी अपने फेलो के तौर पर चुनती है। इसके तहत उन्हें एफआरएसबी की फेलोशिप मिलती है।
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डॉ. हसन को यह सम्मान कैंसर ऑफ न्यूरोडिजनरेटि जैसी बीमारियों के थेरप्यूटिक मैनेजमेंट इस्तेमाल में हाई अफिनिटी सेलक्टिव काइनेस इन्हिबीटर की खोज करने के लिए दिया गया है।
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डॉ. हसन ने वर्ष 2007 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से पीएचडी डिग्री हासिल करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया ज्वाइन करके अपने रिसर्च को आगे बढ़ाया।
इंसानों में पाए जाने वाले असामान्य एंजाइम काइनेस पर नियंत्रण पाने के लिए रिसर्च पर फोकस किया। काइनेस पर काबू पाने के लिए खोजी गई दवाओं में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हाल ही में फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के लिए भी चुना गया था।
खास बात यह है कि डॉ हसन ऐसे भारतीय वैज्ञानिकों में हैं, जिन्हें बेहद ही कम आयु में रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री और रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी के लिए चुन कर उनके रिसर्च को मान्यता दी गई। इस उपलब्धि पर डॉ. हसन ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बड़ी बात है।
खास बात यह है कि डॉ हसन ऐसे भारतीय वैज्ञानिकों में हैं, जिन्हें बेहद ही कम आयु में रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री और रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी के लिए चुन कर उनके रिसर्च को मान्यता दी गई। इस उपलब्धि पर डॉ. हसन ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बड़ी बात है।