नर्सरी दाखिला : 62 तरह के मानकों पर रोक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी के लगभग 1700 निजी स्कूल नर्सरी दाखिला प्रक्रिया में वेजिटेरियन, नॉन स्मोकर्स, पहला बच्चा जैसे मानकों को शामिल नहीं कर पाएंगे। इस सत्र में कुल 62 तरह के मानकों पर रोक लगाई गई है।
दरअसल, स्कूल दाखिला फार्मूला में कई क्राइटेरिया को शामिल कर अंक देते हैं। शिक्षा निदेशालय ने गाइडलाइंस में साफ कहा है कि स्कूलों को ऐसे मानक तय करने होंगे जो न केवल अच्छी तरह से परिभाषित, न्यायसंगत, भेदभाव रहित, स्पष्ट व पारदर्शी हो।
दरअसल, कुछ स्कूल पहला बच्चा, अभिभावकों की शैक्षणिक योग्यता, स्कूल परिवहन, अभिभावकों के काम करने, चचेरे व ममेरे पहले भाई बहन, स्थानांतरण, अभिभावकों के संगीत व खेल में राष्ट्रीय पुरस्कृत होने, अभिभावक के सामाजिक कार्य, बच्चे की स्थिति, पहली बार दाखिला पा रहे, पहले आओ पहले पाओ, साक्षात्कार, संयुक्त परिवार, अभिभावकों का राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक व खेल रिकॉर्ड, मैनेजमेंट कोटा जैसे मानकों को शामिल कर अंक देते हैं। इस कारण कई बच्चे के दाखिले से वंचित रह जाते हैं।
स्कूलों ने भी कसी कमर
गाइडलाइंस मिलने के बाद अब स्कूल फार्मूला तैयार करने में जुटे हैं। कुछ स्कूलों ने फार्मूला तैयार कर लिया है, कुछ अंतिम रूप दे रहे हैं। ज्यादातर स्कूल नेबरहुड (पड़ोस) पर फोकस कर रहे हैं। इसके लिए 50 से 70 अंक तक रख रहे हैं।
द्वारका स्थित एन.के. बगरोड़िया स्कूल ने मानक तय कर जारी भी कर दिए हैं। स्कूल ने सिर्फ दो मानकों नेबरहुड (पड़ोस) व सिबलिंग (भाई-बहन) स्टाफ को ही शामिल किया है। स्कूल ने पड़ोस के लिए चार श्रेणियां बनाई है। पहली श्रेणी 0-1 किलोमीटर है, जिसके लिए सबसे अधिक 70 अंक मिलेंगे।
जबकि दूसरी श्रेणी 1-3 किलोमीटर की है जिसके लिए 60 अंक, तीसरी श्रेणी 3-6 किलोमीटर, जिसके लिए 50 अंक मिलेंगे। वहीं, जिस बच्चे के घर से स्कूल की दूरी 6 किलोमीटर से अधिक होगी उसे 40 अंक मिलेंगे। वहीं, दूसरे मानक सिबलिंग व स्टाफ के लिए स्कूल ने 30-30 अंक तय किए हैं।