JNU : दाखिला नियमों को मंजूरी, छात्रों में आक्रोश
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एमफिल के बाद अब पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला सिर्फ प्रवेश परीक्षा के आधार पर मिलेगा। दरअसल जेएनयू अकेडमिक काउंसिल में दाखिला नियमों में बदलाव कर इंटीग्रेटिड पीएचडी की विंडो बंद कर दी गई है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के इस फैसले से छात्रों में आक्रोश है, क्योंकि अब उन्हें जेएनयू से एमफिल की डिग्री लेने के बाद जरूरी नहीं कि पीएचडी की सीट मिल ही जाए। जेएनयू प्रबंधन के मुताबिक, अभी तक विश्वविद्यालय में एमफिल में दाखिले लेने वाले छात्रों को पीएचडी में सीट मिल जाती थी।
यानी एमफिल के बाद उन्हें पीएचडी डिग्री के लिए दोबारा प्रवेश परीक्षा की जरूरत नहीं होती थी। हालांकि पुराने नियम के चलते कई बाहरी छात्र पीएचडी सीट हासिल नहीं कर पाते थे, क्योंकि सीट पहले ही भर जाती थीं।
कई विश्वविद्यालयों ने इंटीग्रेटिड पीएचडी को पहले ही बंद कर दिया था, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा था। इसी के चलते जेएनयू प्रबंधन ने भी नियमों में बदलाव किया है।
संस्कृत स्कूल का नाम भी बदला
नए नियम के बाद जेएनयू में पीएचडी की सीट ओपन रहेंगी। यानी छात्र ने जेएनयू से एमए या एमफिल कर रखी हो या फिर किसी अन्य विश्वविद्यालय से पास आउट छात्र आवेदन कर रहा हो, अब पीएचडी सीट प्रवेश परीक्षा पास करने के आधार पर ही मिलेगी।
बता दें कि इसी बैठक में संस्कृत स्कूल का नाम स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडी हो गया है। इसके अलावा स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और स्कूल ऑफ मैनेजमेंट खोलने को भी हरी झंडी मिली है।
छात्रसंघ से बात न करने का आरोप
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष गीता ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के इस फैसले पर विरोध जताया है। सत्र 2018-19 में दाखिले के लिए दिसंबर में प्रवेश परीक्षा होगी। इस प्रकार दाखिला नियमों में बदलाव से छात्र में आक्रोश है। आरोप है कि विवि ने छात्रसंघ से इस संबध में कोई बात नहीं की।