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10वीं-12वीं में एक साथ न हो कोर और एडिशनल विषयों के पेपर, हाई पावर कमेटी ने तैयार किए सुझाव

Mon, 04 Jun 2018 01:52 PM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Jun 2018 01:52 PM IST
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high power committee gave proposal that in 10 12 class no combined exam of core additional subjects

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में कोर ( मुख्य पांच पेपर) और एडिशनल ( चुनाव वाले विषय) विषय के पेपर अब एक साथ नहीं होने चाहिए। पहले मुख्य फिर एडिशनल विषय के पेपर करवाए जाने चाहिए।

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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2018 में पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने आईआईटी विशेषज्ञों संग सुझाव ये तैयार किए हैं। कमेटी जल्द ही सरकार को रिपोर्ट भेजेगी। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा में हर सेंटर पर अलग रंग और निशान वाले पेपर भेजे जाने चाहिए, ताकि यदि लीक हो तो पता लग सके कि गलती कहां और किस स्तर पर हुई है।
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सूत्रों के मुताबिक, कमेटी का मानना है कि बोर्ड परीक्षा लंबी चलती है। जिससे पेपर लीक की संभावना बढ़ जाती है। लंबा समय होने के कारण ऐसी व्यवस्था को फुलप्रूफ नहीं बनाया जा सकता है।
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बोर्ड परीक्षा सात हफ्तों की होती है, जिसे  चार या पांच हफ्तों तक करना चाहिए। जब कोर और एडिशनल विषयों की डेट शीट अलग-अलग तैयार होगी तो परीक्षा समय अवधि चार या पांच हफ्तों की रह जाएगी।

12वीं में 168, 10वीं में 70 एडिशनल विषय
 बता दें कि 12वीं में करीब 168 व 10वीं में करीब 70 एडिशनल विषय हैं। फिलहाल, कोर (हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सोशल साइंस, साइंस या कॉमर्स, आट्रर्स, नॉन मेडिकल या मेडिकल) विषयों की परीक्षा के बीच एडिशनल विषयों की भी परीक्षा होती रहती है। कई बार एक विषय में दो और एक हफ्ते तक का अंतराल होता है। ऐसे में छात्रों को परेशानी होती है।

एक परीक्षार्थी के लिए भी बनता है सेंटर
कमेटी का कहना है कि 2018 की 12वीं परीक्षा में देशभर में म्यूजिक विषय के सिर्फ तीन, मेटिरियल एंड चाइल्ड हेल्थ में एक, फंडामेंटल ऑफ नर्सिंग में एक, सिक्योरिटी में एक, ब्यूटी एंड केयर में 1,242, इलेक्ट्रिकल में सिर्फ 166 छात्र थे। जबकि बोर्ड को एक परीक्षार्थी के लिए भी सेंटर बनना पड़ता है। ऐसे में कोर विषयों की परीक्षा एक साथ पहले ली जानी चाहिए। जबकि एडिशनल विषय की सबसे आखिरी में होनी चाहिए। जैसे प्रैक्टिकल परीक्षाएं होती हैं। इसके अलावा अन्य शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर एडिशनल विषयों की संख्या कम करने का भी कमेटी ने सुझाव दिया है।


हर केंद्र पर हो अलग रंग के पेपर
फिलहाल, सभी सेंटर पर एक समान प्रश्न पत्र तैयार होते हैं। यह पता लगाना मुश्किल होता है कि पेपर लीक  कहां से हुआ है। कमेटी का सुझाव है कि प्रति सेंटर अलग रंग व निशान के प्रश्न पत्र भेजे जाए, ताकि गलती पर सही जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्रिंटिंग प्रेस की बजाय स्कूल में ऑन द स्पॉट प्रश्न पत्र बनाए जाए। इसकी पूरी व्यवस्था की जानी चाहिए। परीक्षा से जुड़े अधिकारियों को समय समय पर बदला जाए। व्यवस्था में भी लगातार बदलाव हों।

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