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छह लाख बच्चों को वर्दी और पाठ्य सामाग्री न देने पर हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Fri, 12 Aug 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 12 Aug 2016 12:03 AM IST
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High Court stict on uniform and study content of studnets
कोर्ट - फोटो : file photo

हाईकोर्ट ने करीब 6 लाख बच्चों को टैस्ट बुक, पाठ्य सामाग्री, वर्दी इत्यादि न देने पर ईस्ट एमसीडी व नार्थ एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले ही दिन बच्चों को यह सामाग्री उपलब्ध हो इसकेलिए अदालत को मामले की निगरानी रखनी पड़ेगी।

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न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि निजी स्कूलों में बच्चों को पाठ्य सामाग्री पहले ही दिन उपलब्ध करवा दी जाती है तो सरकारी स्कूलों में ऐसा क्यों नहीं किया जाता। 
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अदालत ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र आधे से ज्यादा पूरा हो चुका है लेकिन बच्चों के पास न तो किताबे है न ही लेखन सामाग्री। ऐसे में वे शिक्षा कैसे प्राप्त कर सकते है।
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अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि सरकारी स्कूलों में भी उक्त सामाग्री शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले ही दिन मिल जाए। अदालत ने कहा कि अगले वर्ष ऐसा हो इसके लिए वे मामले की निगरानी रखेगें। 

अदालत ने कहा कि छह लाख बच्चों को लेखन सामाग्री समय पर नहीं मिली क्यों न इस मामले की जांच के आदेश दिए जाए। अदालत के रवैये को देख ईस्ट एमसीडी के अधिवक्ता ने कहा कि किताबे व अन्य सामाग्री का वितरण एक सप्ताह में शुरू कर दिया जाएगा और एक माह में पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

नार्थ एमसीडी के अधिवक्ता ने कहा कि मात्र रोहिणी जोन में ही किताबे नहीं दी जा चुकी है और अगले तीन दिन में किताबे दी जानी शुरू हो जाएगी।

वहीं दूसरी तरफ बच्चों की और से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत से आग्रह किया कि यह काफी गंभीर मामला है और इस मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अदालत ने मामले की सुनवाई 17 अगस्त तय की है।

अदालत ने पिछली सुनवाई में भी नाराजगी जताते हुए कहा था कि जब तक बच्चों को उक्त पाठ्य सामाग्री नहीं मिलती अधिकारियों को भी वेतन नहीं दिया जाना चाहिए। 


अदालत कक्षा एक व तीन के दो बच्चों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा था कि यह काफी दुखदायी है कि आधा शिक्षा सत्र बीतने के बावजूद अभी तक बच्चों को किताब-कापियां व वर्दी इत्यादि नहीं दिए गए। अदालत ने कहा था कि बच्चें शिक्षा के अधिकार के कानून के तहत उक्त सामान लेने के हकदार है।

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