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10वीं की परीक्षा ना होने को लेकर नाराज दिखी अदालत, पूछे ये सवाल

Mon, 02 Apr 2018 07:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 02 Apr 2018 07:46 PM IST
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high court questioned delhi police,cbse and hrd for not taking action on 10th class paper leak
delhi high court

हाईकोर्ट ने पेपर लीक के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दसवीं कक्षा के गणित की परीक्षा को गंभीरता से न लेने पर बोर्ड को आड़े हाथों लिया।

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कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई व दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दस दिन के भीतर जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बोर्ड से पूछा कि अर्थशास्त्र की परीक्षा 25 अप्रैल व गणित की परीक्षा जुलाई में क्यों करवाई जा रही है।
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दसवीं की परीक्षा को बोर्ड क्यों गंभीरता से नहीं ले रहा है। इस याचिका में पेपर लीक मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में करवाने की मांग की गई है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की गई है। एनजीओ ‘सोशल जूरिस्ट’ ने यह याचिका दायर की है।

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याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि बोर्ड बारहवीं की परीक्षा तो अप्रैल में करवा रहा है, लेकिन दसवीं की जुलाई में करवाएगा, जिसकी तारीख अभी तय नहीं है। इससे दसवीं की परीक्षा देने वाले छात्रों का समय बर्बाद होगा, जिसका उनकी पढ़ाई पर असर पड़ेगा।

याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक में सरकार व बोर्ड की लापरवाही जिम्मेदार है। अर्थशास्त्र व गणित की परीक्षा से 28 लाख छात्रों का हित प्रभावित हुआ है, लेकिन इन छात्रों की क्षतिपूर्ति के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

पेश याचिका में कहा गया है कि इस मामले में सरकारी अधिकारियों को बचाने के लिए पुलिस सही दिशा में जांच नहीं कर रही है, इसलिए इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में करवाई जाए।

अगर यह संभव नहीं है तो अर्थशास्त्र की तरह ही गणित की परीक्षा भी अप्रैल में करवाई जाए। दोबारा परीक्षा में छात्रों को अंक देने में रियायत की जाए और दिव्यांग छात्रों का विशेष ध्यान रखा जाए। 

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