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डूसू चुनाव पोस्टरबाजी : हाईकोर्ट ने छात्र नेताओं से पूछा उन पर क्यों न की जाये कार्रवाई

Tue, 12 Sep 2017 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नर्ई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नर्ई दिल्ली Updated Tue, 12 Sep 2017 09:37 AM IST
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high  court asked student leader why should court not take action
डूसू चुनाव - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने डूसू चुनाव के दौरान प्रत्याशियों द्वारा लगाए गए पोस्टरों को गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस बात पर  नाराजगी जताई कि रोक के बावजूद प्रत्याशियों ने जमकर पोस्टर लगाकर सार्वजनिक संपत्ति को खराब किया है।

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अदालत ने चुनाव में दावेदारी ठोकने वाले तकरीबन सभी छात्रों को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश है कि क्यों न उनके खिलाफ दिल्ली मेट्रो रेल कोरपोरेशन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाये। यह नोटिस कोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुये जारी किया है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायाधीश सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने रॉकी तुसीड, अंकिव बसोया, मीनाक्षी मीणा, सुधीर समेत एक दर्जन से ज्यादा छात्रों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के बाहर लगे पोस्टरों व ग्रेफिटी (स्प्रे पेंट कला) की तस्वीरें देखने के बाद जारी किया है।
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कोर्ट ने डूसू चुनाव आयुक्त को इन छात्रों को नोटिस सर्व करवाने की जिम्मेदारी दी है। इन छात्रों को 20 सितंबर तक अपना पक्ष रखना है। याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की स्थायी अधिवक्ता साक्षी पोपली ने बताया कि इस मामले में अब तक 33 एफआईआर अज्ञात लोगों पर दर्ज की जा चुकी हैं लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।

10 साल तक की सजा दी जा सकती है

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डूसू चुनाव - फोटो : अमर उजाला

याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा ने कहा कि डूसू चुनावों में छात्र नेताओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन पर पोस्टरों के अलावा स्प्रे पेंट से दीवारों को रंग दिया है। दीवारों से पोस्टरों को हटाया जा सकता है लेकिन पेंट को साफ नहीं किया जा सकता। इन दीवारों या टाइलों को तोड़ना पड़ेगा।
 

याची  ने कहा इसके मद्देनजर इन छात्र नेताओं पर दिल्ली मेट्रो रेल अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिये। इस कानून में यह अपराध संज्ञेय व गैर जमानती है। इसके लिये दस साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके तहत पुलिस को मुकदमा दर्ज करने व कार्रवाई करने का अधिकार है।


कोर्ट ने पुलिस के जवाब पर पूछा कि इन छात्रों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने बताया कि अब तक 33 एफआईआर दर्ज की गई है लेकिन किसी छात्र को उनके भविष्य के मद्देनजर गिरफ्तार नहीं किया गया है।


उत्तरी दिल्ली नगर निगम की वकील ने बताया कि निगम ने काफी हद तक पोस्टर हटाये हैं और कई शिकायतें दर्ज की गई हैं।  कोर्ट ने दोबारा तीनों नगर निगमों, दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है कि अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।

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