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हरियाणा बोर्ड रिजल्टः पलवल की मानसी बनी सेकंड टॉपर, जिले का प्रदर्शन तीसरे साल भी फिसड्डी

Sat, 19 May 2018 10:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल Updated Sat, 19 May 2018 10:02 AM IST
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haryana board result 2018: palwal girl manasi 2nd topper in state but district condition gets worsen
प्रदेश में सेकंड टॉपर छात्रा मानसी - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा शुक्रवार शाम 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया गया। परिणाम में भले ही पलवल जिले की एक लड़की ने प्रदेश भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया हो लेकिन उसके बाद भी पलवल जिला सबसे निचले पायदान पर रहा है।

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पिछले साल की तुलना में इस वर्ष पलवल का परिणाम भी 10 फीसदी घटा है। गत वर्ष पलवल जिला फरीदाबाद जिले से बेहतर प्रदर्शन कर 16वें पायदान पर रहा था, वहीं इस बार  21वें पायदान पर रहा है। निजी स्कूलों के मुकाबले इस बार भी सरकारी स्कूलों का परिणाम काफी खराब है। इस वर्ष पलवल जिले में 10 हजार के करीब बच्चों ने 12 की परीक्षा दी थी।
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बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणाम में जीवन ज्योति स्कूल की छात्रा मानसी गोयल ने 500 में से 483 अंक लेकर हरियाणा में दूसरा स्थान प्राप्त कर पलवल जिले की लाज बचाई है। इस वर्ष पलवल जिले का परिणाम मात्र 44.64 प्रतिशत रहा जबकि गत वर्ष 54.20 प्रतिशत परिणाम रहा था।
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उससे पहले वर्ष 2016 में 56.73 प्रतिशत रहा था। यदि पिछले तीन साल के परिणामों पर प्रकाश डाला जाए तो पलवल जिला हर वर्ष परीक्षा परिणाम में पिछड़ता जा रहा है। शिक्षाविदों का मानना है कि पलवल जिले के शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ने का मुख्य कारण सरकारों का इस क्षेत्र में शिक्षा की तरफ ध्यान न देना है।

स्कूलों में अब केवल परिणाम पर ध्यान दिया जाता है

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छात्रा मानसी - फोटो : अमर उजाला

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि स्कूलों में अब केवल परिणाम पर ध्यान दिया जाता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बजाय उनकी प्रतिशत अंक ज्यादा कैसे आए, केवल उस तरह की पढ़ाई कराई जाती है।

बच्चों से रट्टा मारवाया जा रहा है। यही कारण है कि बच्चे परीक्षाओं में उसी हिसाब से सवालों के जवाब लिखते हैं। सरकारी स्कूलों पर तो शिक्षा विभाग का ध्यान बिल्कुल भी नहीं है।

शर्मा का कहना है कि सरकारी स्कूलों का परिणाम घटने का कारण स्कूलों में शिक्षकों व सुविधाओं की कमी होना है। जबकि निजी स्कूल संचालक केवल स्कूल के रिजल्ट पर ध्यान देते हैं।

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