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हरियाणा बोर्डः पिछली गलतियों से नहीं लिया सबक, 10वीं में भी फरीदाबाद सबसे पीछे
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 22 May 2017 06:47 PM IST
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10वीं बोर्ड का रिजल्ट निकलने के बाद खुशी मनाती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सोमवार को जारी 10वीं कक्षा के परिणाम ने एक बार फिर सभी को हैरत में डाल दिया। 12वीं के बाद 10वीं कक्षा के परिणाम में भी जिला फिसड्डी साबित हुआ। परीक्षा परिणाम में 21वें पायदान पर आने के बाद दिल्ली से सटे फरीदाबाद की शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई।
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हालांकि, विशेषज्ञों ने 12वीं के परिणाम के बाद 10वीं के नतीजे खराब रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन इतना खराब परिणाम आएगा इसका अंदाजा तक नहीं था। सोमवार शाम को चार बजे परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया जिसमें 7954 परीक्षार्थियों को ही कामयाबी मिल पाई है। इस बार 10वीं में 11478 परीक्षार्थी फेल हुए हैं।
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वहीं, 1066 विद्यार्थियों की री-अपीयर आई है। बता दें कि, इस बार 10 की बोर्ड परीक्षाओं में कुल 20498 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। प्रदेश के 21 जिलों में सबसे खराब परीक्षा परिणाम फरीदाबाद का रहा है।
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12वीं के परिणाम में भी जिला 21वें पायदान पर था। उधर, स्वयंपाठी (प्राइवेट) परीक्षा परिणाम भी मात्र 31.79 प्रतिशत रहा है। हालांकि, स्वयंपाठी परिणाम में मुख्यमंत्री का गृहजिला करनाल फरीदाबाद से भी पीछे हैं। यहां का परिणाम 31.12 फीसदी रहा है।
पिछले तीन वर्ष का परीक्षा परिणाम
वर्ष प्रतिशत प्रदेश में स्थान
2015 37.33 14 वां
2016 34.47 21 वां
2017 38.80 21 वां
प्रदेश के अन्य जिलों से तुलना
जिला परीक्षा परिणाम फेल विद्यार्थी पास विद्यार्थी
पलवल 48.78 7619 8316
मेवात 43.63 4094 3679
करनाल 41.35 9229 7139
स्वयंपाठी विद्यार्थियों का परिणाम एक नजर में
आवेदन करने वालों की संख्या -5067
परीक्षा में शामिल विद्यार्थी -3456
पास विद्यार्थी -1611
परीक्षा परिणाम प्रतिशत -31.79
प्रदेश में स्थान -20 वां
दसवीं का रिजल्ट आने के बाद खुशी जाहिर करतीं ऋषि मोहन स्कूल की छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
उच्च शिक्षा में जिस प्रकार से औद्योगिक नगरी की पहचान देश में बनी है। उस पर लगातार स्कूली शिक्षा ग्रहण लगाने का काम कर रही है। अब तो हालात यहां तक पहुंच गए है कि पिछले कुछ वर्षो से हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षा की परीक्षा में फरीदाबाद को टॉप टेन में भी जगह नहीं मिल रही है। इस बार के प्रदेश के परीक्षा परिणाम पर नजर डाले तो आकड़े बेहद ही शर्मसार करने वाले रहे है।
पिछले वर्ष भी बेहद खराब रिजल्ट आया था। जिसके बाद माना जा रहा था लापरवाह शिक्षकों पर गाज गिरेगी और शिक्षा में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे लेकिन शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष की गलतियों से भी कोई सबक नहीं लिया। जिसका नतीजा इस बार भी देखने को मिला है।
जानकारों की मानें तो शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन व्यवस्था बनाने में कोई सुधार नहीं कर पा रहा है। पिछले वर्ष के खराब परिणाम के लिए न किसी की जिम्मेदारी तय की गई और न ही किसी पर कोई कार्रवाई हुई। ऐसे में शिक्षकों व अधिकारियों की लापरवाही का खेल जारी रहा। लगातार खराब परीक्षा परिणाम पर सरकार को मंथन करने की जरूरत है।
ये है कारण :
-शिक्षक एवं प्रिंसिपलों की जवाबदेही तय नहीं।
-स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद।
-संसाधनों का अभाव।
-स्कूल मैनेजमेंट में फिसड्डी जिला शिक्षा विभाग।
-छात्र शिक्षक अनुपात में गड़बड़ी।
-स्कूल निरीक्षण मात्र औपचारिकता
खराब परिणाम देने वाले स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जिन स्कूलों ने खराब प्रदर्शन किया है, उनको तलब किया जाएगा। परीक्षा परिणाम की समीक्षा की जा रही है।-डॉ.मनोज कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद
विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। पिछले वर्ष खराब परिणाम आने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अब क्या होगी। कहने को स्मार्ट सिटी बनाने का काम किया जा रहा है, लेकिन शिक्षा का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।-एनएल जांगिड़, अध्यक्ष-फरीदाबाद अभिभावक एकता मंच
निजी स्कूल सही रिजल्ट दे रहे हैं। रिजल्ट खराब आने की वजह बच्चों का शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर होना है। इंटेलीजेंट बच्चे सीबीएसई स्कूलों की तरफ रुझान कर लेते हैं। सरकार को शिक्षा का स्तर सुधारने पर जोर देना चाहिए।-रमेश डागर, अध्यक्ष-प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
पिछले वर्ष भी बेहद खराब रिजल्ट आया था। जिसके बाद माना जा रहा था लापरवाह शिक्षकों पर गाज गिरेगी और शिक्षा में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे लेकिन शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष की गलतियों से भी कोई सबक नहीं लिया। जिसका नतीजा इस बार भी देखने को मिला है।
जानकारों की मानें तो शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन व्यवस्था बनाने में कोई सुधार नहीं कर पा रहा है। पिछले वर्ष के खराब परिणाम के लिए न किसी की जिम्मेदारी तय की गई और न ही किसी पर कोई कार्रवाई हुई। ऐसे में शिक्षकों व अधिकारियों की लापरवाही का खेल जारी रहा। लगातार खराब परीक्षा परिणाम पर सरकार को मंथन करने की जरूरत है।
ये है कारण :
-शिक्षक एवं प्रिंसिपलों की जवाबदेही तय नहीं।
-स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद।
-संसाधनों का अभाव।
-स्कूल मैनेजमेंट में फिसड्डी जिला शिक्षा विभाग।
-छात्र शिक्षक अनुपात में गड़बड़ी।
-स्कूल निरीक्षण मात्र औपचारिकता
खराब परिणाम देने वाले स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जिन स्कूलों ने खराब प्रदर्शन किया है, उनको तलब किया जाएगा। परीक्षा परिणाम की समीक्षा की जा रही है।-डॉ.मनोज कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद
विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। पिछले वर्ष खराब परिणाम आने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अब क्या होगी। कहने को स्मार्ट सिटी बनाने का काम किया जा रहा है, लेकिन शिक्षा का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।-एनएल जांगिड़, अध्यक्ष-फरीदाबाद अभिभावक एकता मंच
निजी स्कूल सही रिजल्ट दे रहे हैं। रिजल्ट खराब आने की वजह बच्चों का शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर होना है। इंटेलीजेंट बच्चे सीबीएसई स्कूलों की तरफ रुझान कर लेते हैं। सरकार को शिक्षा का स्तर सुधारने पर जोर देना चाहिए।-रमेश डागर, अध्यक्ष-प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन